Puducherry Politics: दक्षिण भारत के छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से अहम केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक बार फिर सियासी तस्वीर दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। मई 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों के ताजा रुझानों के मुताबिक, एन. रंगासामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (NDA) गठबंधन बहुमत के साथ सरकार बनाता नजर आ रहा है। 30 सीटों वाली विधानसभा में यह गठबंधन निर्णायक बढ़त हासिल कर चुका है, जिससे सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जा रही है।
क्या है पुडुचेरी का राजनीतिक इतिहास?
पुडुचेरी का राजनीतिक इतिहास इसकी औपनिवेशिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। करीब 138 वर्षों तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहने के बाद 1 नवंबर 1954 को इसका भारत में विलय हुआ। इसके बाद यहां की राजनीति में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लंबे समय तक दबदबा रहा। लेकिन समय के साथ क्षेत्रीय दलों ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
बदलाव का दौर
तमिलनाडु की राजनीति से प्रभावित इस क्षेत्र में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जैसे दलों ने भी असर डाला। हालांकि असली बदलाव 2011 में आया, जब रंगासामी ने कांग्रेस से अलग होकर AINRC का गठन किया और पहली बार सत्ता में काबिज हुए। इसके बाद से पुडुचेरी की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बना रहा।
BJP की भी अहम भूमिका
हाल के वर्षों में भाजपा ने भी यहां अपनी पकड़ मजबूत की है और गठबंधन की राजनीति में अहम भूमिका निभाई है। 2021 में AINRC और BJP के गठबंधन ने सरकार बनाई थी, जिसे अब 2026 में दोहराने की तैयारी दिख रही है। ताजा रुझानों के अनुसार, AINRC-BJP गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और दूसरी बार मिलकर सरकार बनाने की ओर बढ़ रहा है। यह न केवल रंगासामी के नेतृत्व की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि पुडुचेरी में गठबंधन राजनीति की स्थायी भूमिका को भी उजागर करता है।

