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केरल में LDF का किला हुआ ध्वस्त, क्या फिर लौटा 5 साल वाला ट्रेंड?

Kerala Politics: केरल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होता नजर आ रहा है। 4 मई 2026 को आ रहे शुरुआती रुझानों ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी जा चुकी है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) स्पष्ट बढ़त के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रहा है, जबकि मौजूदा लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) पिछड़ता दिख रहा है।

क्या है केरल का राजनितिक इतिहास

केरल में पारंपरिक रूप से राजनीति दो प्रमुख गठबंधनों के बीच घूमती रही है UDF और LDF। 2021 से 2026 तक राज्य में पिनाराई विजयन के नेतृत्व में LDF की सरकार थी, जिसने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचा था। इससे पहले केरल में हर पांच साल में सत्ता बदलने का चलन रहा है, जिसे 2021 में LDF ने तोड़ा था। लेकिन अब 2026 के रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि यह पुराना ट्रेंड फिर लौट सकता है।

बदलेगा आंकड़ों का समीकरण

ताजा आंकड़ों के अनुसार, UDF बहुमत के जादुई आंकड़े 71 को पार कर चुका है और 90 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहा है। दूसरी ओर LDF लगभग 40-45 सीटों के आसपास सिमटता दिख रहा है, जो उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला NDA भी कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराता दिख रहा है, लेकिन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, विकास और प्रशासनिक मुद्दे प्रमुख रहे। UDF ने इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, जिसका असर अब नतीजों में दिखाई देता नजर आ रहा है। हालांकि ये रुझान शुरुआती हैं और अंतिम परिणाम में कुछ बदलाव संभव है, लेकिन तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है।

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