AAP BJP Scuffle in Punjab: पंजाब में 5 मई को अमृतसर और जालंधर में हुए धमाकों के बाद शुरू हुई आप और बीजेपी के बीच जुबानी जंग अब सड़कों तक पहुंच गई है। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच कई जगहों पर झड़प और टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। साल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन उससे पहले 26 मई को होने वाले नगर निगम और नगर परिषद चुनावों ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। इसी बीच सोमवार को तरन-तारन, बटाला और जीरकपुर में भाजपा कार्यालयों पर कथित हमलों और लुधियाना में भाजपा नेताओं पर काली स्याही फेंके जाने की घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
बीजेपी दफ्तर के बाहर लगे ‘मुर्दाबाद’ के नारे
सबसे बड़ी घटना तरन-तारन में सामने आई, जहां कथित तौर पर करीब 15–20 लोगों की भीड़ ने दोपहर लगभग 3 बजे बाईपास स्थित बीजेपी के कार्यालय को निशाना बनाया। इस दौरान हमलावरों ने “बीजेपी मुर्दाबाद” के नारे लगाए और कार्यालय में तोड़फोड़ करते हुए फर्नीचर और खिड़कियों के शीशे क्षतिग्रस्त कर दिए। घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन भाजपा ने इसे पूरी तरह राजनीतिक साजिश करार दिया है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया कि यह हमला सुनियोजित तरीके से कराया गया है। उन्होंने इस घटना की तुलना पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान हुई राजनीतिक हिंसा से करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
बीजेपी नेता सुनील जाखड़ का आया बयान
पंजाब में बीजेपी नेता सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया कि इन हमलों के पीछे सत्ताधारी आप पार्टी का हाथ है। उन्होंने कहा कि राज्य में जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जैसा पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासनकाल के दौरान देखा गया था।
सीएम मान ने पहले बीजेपी पर लगाए थे आरोप
भाजपा इन घटनाओं को अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि पंजाब में बढ़ते राजनीतिक तनाव का हिस्सा बता रही है। यह तनाव तब और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 5 मई को जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय और अमृतसर में सेना मुख्यालय के बाहर हुए धमाकों को लेकर बीजेपी पर आरोप लगाए। 6 मई को भगवंत मान ने कहा था कि यह घटनाएं चुनावी साजिश का हिस्सा हैं और पंजाब को भी बंगाल की तरह निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने इनमें आईएसआई की भूमिका की आशंका जताई थी। इसके बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया, भाजपा ने कानूनी नोटिस भेजा और दोनों पार्टियों के बीच टकराव लगातार तेज होता गया।

