होम = Breaking = पश्चिम बंगाल के स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, प्रार्थना सभा में गाना होगा राष्ट्रीय गीत; जानें व्याख्याओं पर कैसा रहा है विवाद

पश्चिम बंगाल के स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, प्रार्थना सभा में गाना होगा राष्ट्रीय गीत; जानें व्याख्याओं पर कैसा रहा है विवाद

West Bengal Vande Mataram schools: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बड़ा फैसला लेते हुए ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब सभी स्कूलों की मॉर्निंग असेंबली में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय मूल्यों की भावना को मजबूत करना है। इस कदम को भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर महत्वपूर्ण बताया गया है।

स्कूलों में वंदे मातरम् गायन की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग

‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आजादी के संघर्ष का प्रमुख प्रतीक बन गया था। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था।रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि हर छात्र मॉर्निंग असेंबली में वंदे मातरम् के गायन में शामिल हो। इसके साथ ही कई स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि इस आदेश के पालन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी रखी जाए, ताकि नियमों का सही तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

वंदे मातरम गायन के वक्त करना होगा प्रोटोकॉल का पालन

दरअसल, कुछ समय पहले केंद्र सरकार की ओर से भी वंदे मातरम को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। गृह मंत्रालय ने सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन और प्रस्तुति के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल भी जारी किया था। इसके बाद कई राज्यों में इसे लेकर नई पहल शुरू हुई है। राज्य सरकार ने साफ किया है कि स्कूलों में इस आदेश का पालन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में पहले भी राष्ट्रगीत और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर विवाद देखने को मिलते रहे हैं।

चुनाव से पहले गृहमंत्री शाह ने वंदे मातरम संग्रहालय पर दिया था बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव से पहले न्यूटाउन, कोलकाता स्थित बीजेपी कार्यालय में ‘वंदे मातरम संग्रहालय’ का विचार रखा। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए बंगाल की संस्कृति और वंदे मातरम की परिकल्पना को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। हाल के समय में वंदे मातरम को लेकर विवाद राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है और इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में भी बहस देखने को मिली है।

अलग-अलग व्याख्याओं को लेकर विवाद

वंदे मातरम को लेकर विवाद इसके ऐतिहासिक और धार्मिक अर्थों की अलग-अलग व्याख्याओं से जुड़ा है। शुरुआती श्लोकों में मातृभूमि की सुंदरता का वर्णन है, जबकि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ (1882) के बाद के हिस्सों में राष्ट्र को देवी दुर्गा से जोड़ा गया, जिसे कुछ समूह एकेश्वरवाद के खिलाफ मानते हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों जैसे अरविंदो घोष और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है, जबकि आलोचक इसके धार्मिक संदर्भों पर सवाल उठाते हैं। पश्चिम बंगाल में इसे लेकर राजनीतिक मतभेद भी देखने को मिलते हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़ती है और भाजपा इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानती है।

बंगाल