Bargi Dam Cruise Accident Vdeo: मध्य प्रदेश के बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा अब एक साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली नाकामी के रूप में सामने आ रहा है। इस त्रासदी का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने उस भयावह पल की सच्चाई को उजागर कर दिया है जब कुछ ही मिनटों में एक खुशहाल सैर चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई।
वीडियो में दिखता है कि क्रूज के अंदर बैठे पर्यटक सामान्य बातचीत में व्यस्त थे, तभी अचानक तेज़ी से पानी अंदर घुसने लगता है। कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो जाते हैं। बच्चे रोने लगते हैं, लोग घबराकर इधर-उधर भागते हैं और क्रूज तेज़ी से डगमगाने लगता है।
जब डूबने लगा तब खुले लाइफ जैकेट
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि लाइफ जैकेट उस समय बांटी गईं, जब क्रूज पहले ही डूबने की कगार पर पहुंच चुका था। कई यात्री बिना जैकेट के ही नजर आए, जबकि कुछ लोग बंद स्टोरेज से खुद जैकेट निकालने की कोशिश करते दिखे। साफ है कि सुरक्षा नियमों का पालन समय पर नहीं किया गया।नियमों के मुताबिक, हर यात्री को यात्रा शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट देना अनिवार्य है, लेकिन यहां यह बुनियादी व्यवस्था ही गायब रही।
क्षमता से ज्यादा यात्री और मौसम चेतावनी की अनदेखी
इस हादसे में एक और बड़ा खुलासा हुआ है क्रूज पर 29 टिकट जारी किए गए थे, लेकिन सवार 40 से अधिक लोग थे। वहीं, मौसम विभाग ने पहले ही तेज़ आंधी और खराब मौसम की चेतावनी दी थी, बावजूद इसके क्रूज को पानी में उतार दिया गया। अब तक 9 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 4 लोग, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं, अब भी लापता हैं। खराब मौसम के चलते सर्च ऑपरेशन में भी रुकावट आई।
जिंदा बचे लोगों का दर्द
हादसे में बच निकले 72 वर्षीय रियाज हुसैन ने बताया कि किसी भी यात्री को चढ़ते समय लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। जब क्रूज झुकने लगा, तब करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी मची रही और स्टाफ स्थिति संभालने में असफल रहा। अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने भी यही दावा किया कि लाइफ जैकेट केबिन में बंद थीं, जिन्हें लोगों को खुद ढूंढना पड़ा।
मां-बेटे की आखिरी तस्वीर ने झकझोरा
इस त्रासदी की सबसे भावुक कहानी दिल्ली से आए एक परिवार की है। मां ने अपने छोटे बेटे को अपनी ही लाइफ जैकेट में बांधकर सीने से लगा लिया। जब उनके शव मिले, तब भी दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे वो एक तस्वीर जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।
रेस्क्यू में देरी ने बढ़ाया दर्द
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में भी भारी लापरवाही सामने आई। सूचना मिलने के बावजूद शुरुआती टीम समय पर रवाना नहीं हो सकी। तकनीकी समस्याओं के कारण उपकरण बदलने पड़े, जिससे करीब दो घंटे की देरी हुई जो कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी।
स्थानीय लोग बने असली हीरो
शुरुआती समय में स्थानीय मछुआरों, किसानों और ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 15 से ज्यादा लोगों को बचाया। बाद में NDRF और अन्य टीमें मौके पर पहुंचीं।
सरकार का बड़ा एक्शन
हादसे के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे राज्य में क्रूज, मोटरबोट और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही राज्यव्यापी सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया गया है। जिम्मेदारी तय करते हुए क्रूज से जुड़े कई कर्मचारियों को हटाया गया है और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो हादसे के कारणों और लापरवाही की परतें खोलेगी।
बरगी की यह त्रासदी अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की कहानी बन चुकी है जहां चेतावनियां थीं, नियम थे, लेकिन जब खतरा सामने आया, तब सुरक्षा के इंतजाम बंद पड़े थे।
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