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हेट स्पीच मामला: अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को राहत, SC बोला- ‘नहीं बनता संज्ञेय अपराध’

by | Apr 30, 2026 | News Top

SC Declines Brinda’s plea seeking ‘hate speech’: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में दिए गए भाषणों को लेकर दायर मामले में भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को राहत देते हुए कहा है कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने लायक कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने HC के फैसले को बरकरार रखा

इन भाषणों के खिलाफ दर्ज शिकायतों में इन्हें हेट स्पीच बताया गया था। आरोप था कि जनवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाते हुए नफरत फैलाने वाले बयान दिए गए। इस मामले में सीपीएम नेता बृंदा करात और केएम तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार, 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बीजेपी नेताओं के बयान न तो सांप्रदायिक हिंसा को उकसाते हैं और न ही सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ते हैं।

वृंदा करात ने अनुराग-प्रवेश के भाषणों का उल्लेख किया था

आदेश में कहा गया, “रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री, जिसमें कथित भाषण, 26 फरवरी 2020 की स्टेटस रिपोर्ट और निचली अदालतों के तर्क शामिल हैं, का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इस मामले में कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। वहीं, बृंदा करात की याचिका में इन दोनों नेताओं के भाषणों का विस्तृत उल्लेख किया गया था।

दिल्ली में चुनावी सभा में अनुराग ठाकुर ने दिया था बयान

27 जनवरी 2020 को ठाला में आयोजित एक चुनावी सभा में अनुराग ठाकुर नारे लगवाते नजर आए, जहां उन्होंने “देश के गद्दारों को…” कहा और भीड़ ने “गोली मारो…” के नारे लगाए। इसके बाद उन्होंने मंच से कहा कि आवाज पीछे तक जानी चाहिए ताकि सभी सुन सकें। आरोप है कि यह बयान शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाकर दिया गया था। वहीं, एक अन्य वीडियो में परवेश वर्मा को यह कहते सुना गया कि भाजपा की जीत के कुछ ही घंटों में प्रदर्शनकारियों को “भगा दिया जाएगा” और यह भी दावा किया गया कि अगर उन्हें नहीं रोका गया तो वे “बलात्कार और हत्या” जैसी घटनाएं कर सकते हैं।