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मई में फरवरी जैसी ठंड, 13 डिग्री तक लुढ़का पारा, अब फिर मंडरा रहा नया खतरा

Weather Update: उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला है कि लोगों को जेठ के महीने में फरवरी जैसी ठंड महसूस होने लगी है। प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश, आंधी और ठंडी हवाओं ने गर्मी का असर लगभग खत्म कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि कई शहरों में तापमान सामान्य से 10 से 13 डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने फिलहाल राहत की बात कही है, लेकिन सोमवार से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना जताई गई है।

कई हिस्सों में अच्छी बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई। राजधानी लखनऊ समेत तराई, पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के जिलों में मौसम पूरी तरह बदला नजर आया। सबसे ज्यादा 27 मिमी बारिश जालौन में दर्ज की गई, जबकि महराजगंज में 23 मिमी और झांसी में 20 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलीं, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

बारिश और ठंडी हवाओं का असर तापमान पर साफ दिखाई दिया। हरदोई, इटावा, बरेली और नजीबाबाद में अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 13 डिग्री तक नीचे चला गया। नजीबाबाद में 25 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे कम अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम के इस बदलाव ने लोगों को हैरान कर दिया है।

कभी तेज धूप तो कभी घने बादल

राजधानी लखनऊ में भी गुरुवार का दिन पूरी तरह बदले हुए मौसम के नाम रहा। सुबह तड़के तेज बारिश और गरज-चमक के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद दोपहर और शाम तक रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। कभी तेज धूप तो कभी घने बादलों ने पूरे दिन मौसम को सुहावना बनाए रखा। ठंडी हवाओं के कारण लोगों को मई के बजाय सर्दियों जैसा एहसास हुआ।

मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ चुका है, इसलिए अगले दो दिनों तक बारिश में कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि सोमवार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक नया कमजोर पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे सकता है, जिसके असर से हल्की बारिश और बूंदाबांदी फिर शुरू होने की संभावना है।

बाढ़ का बढ़ता खतरा

इधर मौसम के बदले मिजाज के बीच प्रदेश सरकार ने मानसून से पहले बाढ़ से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद की अध्यक्षता में बाढ़ अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा हुई। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 44 जिलों, 118 तहसीलों, 2500 गांवों और 5600 मजरों को बाढ़ के लिहाज से अति संवेदनशील घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों की सूची संबंधित विभागों और राहत एजेंसियों को भेजी जा रही है ताकि समय रहते तैयारी पूरी की जा सके।

बाढ़ सुरक्षा कार्य हुआ शुरू

सरकार ने सिंचाई विभाग को 15 जून तक सभी बाढ़ सुरक्षा कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं। लोक निर्माण विभाग को तटबंधों और राहत शिविरों तक पहुंचने वाली सड़कों की मरम्मत कराने को कहा गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को जरूरी दवाइयों और टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश मिले हैं। पंचायती राज विभाग को नाव, नाविक और गोताखोरों की सूची अपडेट रखने को कहा गया है।

मौसम के अचानक बदले इस रूप ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं आने वाले दिनों में फिर बदलते मौसम और संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है।

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