Tamil Nadu New Govt: विजय की पार्टी TVK को तमिलनाडु में सरकार गठन के लिए बड़ा राजनीतिक सहारा मिल गया है। कांग्रेस के समर्थन के बाद अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, सीपीएम और वीसीके ने भी TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही विजय की पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचती नजर आ रही है। चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK अब सरकार बनाने की स्थिति में मजबूत दिखाई दे रही है। तमिलनाडु की राजनीति में यह समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। इस बीच सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि दशकों से एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे DMK और AIADMK सत्ता की नई बाजी खेलने के लिए हाथ मिला सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर माना जाएगा।
थलापति के आगे अभी कई चुनौतियाँ
इस पूरे सियासी संकट के केंद्र में अभिनेता से नेता बने विजय हैं, जिनकी पार्टी TVK ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की है। पहली बार चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी ने तमिल राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया। हालांकि, बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पार्टी को अभी भी कई विधायकों के समर्थन की जरूरत है।
सूत्रों के मुताबिक, विजय सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने में जुटे हुए हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने तीन दिनों के भीतर दो बार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की। माना जा रहा है कि TVK कांग्रेस के समर्थन के सहारे सरकार बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन राज्यपाल अभी इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि विजय के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
DMK और AIADMK आ सकते है साथ?
इसी बीच तमिल राजनीति में एक नया समीकरण तेजी से चर्चा में आ गया है। खबरें हैं कि द्रविड़ राजनीति की दो सबसे बड़ी पार्टियां DMK और AIADMK, विजय को सत्ता से दूर रखने के लिए एक साझा रणनीति पर काम कर सकती हैं। अगर दोनों दल साथ आते हैं, तो यह करीब 50 वर्षों की राजनीतिक दुश्मनी खत्म होने जैसा होगा।
UP की राजनीति में हुआ था कुछ ऐसा
राजनीतिक जानकार इस संभावित गठबंधन की तुलना उत्तर प्रदेश की राजनीति से कर रहे हैं। वर्ष 1993 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भाजपा को रोकने के लिए हाथ मिलाया था। बाद में दोनों दलों के रिश्ते खराब हुए, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव और मायावती फिर एक मंच पर नजर आए थे। अब तमिलनाडु में भी कुछ वैसी ही राजनीतिक पटकथा लिखे जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां
DMK और AIADMK लंबे समय से तमिल राजनीति की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां रही हैं। दोनों दलों ने बारी-बारी से राज्य की सत्ता संभाली और एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए। लेकिन इस बार विजय की पार्टी के उभार ने दोनों दलों के वोट बैंक और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है। यही वजह है कि सत्ता से बाहर होने का खतरा महसूस कर रहे दोनों दल अब नए विकल्प तलाशते दिखाई दे रहे हैं।
इस बीच AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि राज्य में अगली सरकार उनकी पार्टी ही बनाएगी। उन्होंने अपने विधायकों के साथ अहम बैठक की और उन्हें धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया।
AIADMK की बैठक चालू
सूत्रों के अनुसार, AIADMK के 28 विधायकों को फिलहाल पड़ोसी पुडुचेरी के एक आलीशान रिसॉर्ट में ठहराया गया है। गुरुवार देर रात पलानीस्वामी ने वहां पहुंचकर विधायकों से मुलाकात की और बदलते राजनीतिक हालात पर लंबी चर्चा की। बैठक के दौरान विधायकों ने कथित तौर पर उनके नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए समर्थन पत्र भी सौंपे।
तमिलनाडु में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण राजनीतिक अनिश्चितता लगातार बनी हुई है। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विजय सत्ता तक पहुंच पाएंगे या फिर पुराने राजनीतिक दुश्मन एकजुट होकर उन्हें सत्ता से बाहर रखने की रणनीति सफल कर देंगे।
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