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ड्राइवर का बेटा बना सत्ता का खिलाड़ी, थलापति विजय का भरोसा लाया रंग, जाने कौन हैं शबरीनाथन?

Thalapathy Vijay Driver Son MLA: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को चौंका दिया। साउथ सुपरस्टार थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कजगम) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राजनीति में धमाकेदार एंट्री की है। इसी जीत के बीच एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है आर शबरीनाथन, जो कभी विजय के ड्राइवर के बेटे के रूप में जाने जाते थे और अब विधायक बन चुके हैं।

ड्राइवर के बेटे की ऐतिहासिक जीत

विरुगंबक्कम सीट से चुनाव लड़ते हुए शबरीनाथन ने सत्तारूढ़ दल DMK के दिग्गज नेता एएमवी प्रभाकर राजा को 27 हजार से ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह जीत सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि एक ऐसे सफर की कहानी है जो संघर्ष से शुरू होकर सत्ता तक पहुंचा है। शबरीनाथन के पिता राजेंद्रन पिछले तीन दशकों से यानि 30 साल से विजय के साथ ड्राइवर के रूप में जुड़े रहे हैं। विजय ने शबरीनाथन को बचपन से बढ़ते देखा और उन पर भरोसा जताते हुए अपनी पार्टी से टिकट दिया जो अब एक बड़ा राजनीतिक दांव साबित हुआ।

टिकट मिलने पर भावुक हुए शबरीनाथन

जब विजय ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारा, तब यह फैसला चर्चा का केंद्र बन गया था। टिकट मिलने के दौरान शबरीनाथन भावुक होकर रो पड़े थे, जो उनके संघर्ष और इस मौके की अहमियत को दर्शाता है।

शिक्षा और बैकग्राउंड

शबरीनाथन पढ़ाई में भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने डॉ. एमजीआर शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान से 2021 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके अलावा उन्होंने इसी क्षेत्र में डिप्लोमा भी किया है। उनकी स्कूली शिक्षा वेधा विकास मैट्रिकुलेशन स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 2013 में 12वीं पास की।

TVK का ‘ब्लॉकबस्टर’ प्रदर्शन

इस चुनाव में विजय की पार्टी ने उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया। 234 सीटों वाली विधानसभा में TVK ने 100 से अधिक सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में नई ताकत के रूप में खुद को स्थापित कर लिया। खुद विजय ने पेरम्बूर सीट से 50 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर दी।

क्यों खास है यह जीत?

शबरीनाथन की जीत सिर्फ राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि मेहनत और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है। ड्राइवर के बेटे से विधायक बनने तक का यह सफर अब तमिलनाडु की राजनीति में एक नई प्रेरणादायक कहानी बन चुका है।

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