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गिर के जंगलो में 8 शेर शावकों की मौत, गर्मी बनी वजह

Gujarat: गुजरात के गिर वन में आठ एशियाई शेर शावकों की मौत की खबर सामने आई है। इसका कारण किसी संक्रामक बीमारी को नहीं, बल्कि अत्यधिक गर्मी से हुआ तनाव और कमजोर इम्युनिटी बताया गया है। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शनिवार (6 जून 2026) को इसकी पुष्टि की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में बाबेसिया (Babesia) या किसी अन्य वायरल संक्रमण के कारण मौत की बात सामने नहीं आई है।

जांच के बाद संक्रमण की आशंका खारिज

कुछ दिन पहले वन विभाग ने आशंका जताई थी कि शावकों की मौत टिक-जनित परजीवी संक्रमण बाबेसिया के कारण हो सकती है। इसके बाद क्षेत्र में व्यापक निगरानी और रोग नियंत्रण अभियान शुरू किया गया था। हालांकि, जांच रिपोर्ट में इस संभावना को खारिज कर दिया गया।

गर्मी और कमजोर इम्युनिटी बनी मुख्य कारण

मंत्री के अनुसार, शावकों की मौत अत्यधिक गर्मी और उससे जुड़ी शारीरिक कमजोरी के कारण हुई। जिन शावकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर थी, वे इस स्थिति को सहन नहीं कर सके।

इलाके में अलर्ट और जांच अभियान

गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में शावकों की मौत के बाद वन विभाग ने 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शेरों को निगरानी में रखा। संदिग्ध संक्रमण को देखते हुए उनके सैंपल गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भेजे गए थे।

17 शेरों का इलाज, कई को जंगल में छोड़ा गया

वन विभाग के अनुसार, 17 शेरों को बीमार हालत में क्वारंटीन कर इलाज किया गया। इनमें से 12 शेरों को ठीक होने के बाद जंगल में वापस छोड़ दिया गया है, जबकि बाकी 5 शेर अब स्वस्थ हैं और जल्द ही उन्हें भी प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

बड़े स्तर पर स्वास्थ्य अभियान

संक्रमण की आशंका को देखते हुए करीब 600 शेरों को डीवर्मिंग और टिक-नियंत्रण उपचार दिया गया। अधिकारियों ने व्यापक स्वास्थ्य निगरानी अभियान चलाकर संक्रमण फैलने की संभावना को रोका।

पहले की घटनाएं और सतर्कता

वन विभाग ने बताया कि हाल के समय में किसी संक्रामक बीमारी से शेरों की मौत दर्ज नहीं की गई है। एक शेरनी की मौत गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुई थी, जबकि अन्य मामलों में कोई खतरनाक रोगजनक नहीं पाया गया।

बाबेसिया क्या है?

यह सूक्ष्म परजीवी (माइक्रोस्कोपिक पैरासाइट) का एक समूह है जो लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करता है। इसके संक्रमण से होने वाली बीमारी को बेबेसिओसिस (Babesiosis) कहा जाता है। यह मुख्य रूप से संक्रमित टिक्स (किलनी/चिचड़ी) के काटने से फैलता है। इसके अलावा, दूषित रक्त के ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाने) या संक्रमित गर्भवती मां से बच्चे में भी यह फैल सकता है। कई संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते। लक्षण आने पर फ्लू जैसे संकेत मिलते हैं:

  • तेज बुखार और ठंड लगना
  • अत्यधिक पसीना आना और थकानसिरदर्द
  • शरीर और जोड़ों में दर्द
  • पीलिया या गहरे रंग का पेशाब आना

गिर: एशियाई शेरों का अंतिम प्राकृतिक घर

गिर वन एशियाई शेरों का दुनिया में एकमात्र प्राकृतिक आवास है। कभी एशिया के बड़े हिस्सों में पाए जाने वाले ये शेर अब केवल गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं।

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