Gold-Silver Prices Today: अक्षय तृतीया पर जबरदस्त खरीदारी के ठीक बाद सोमवार को बाजार खुलते ही सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। जहां चांदी की कीमतों में 5,000 रुपये से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं सोना भी करीब 1,700 रुपये तक सस्ता हो गया। रविवार को अक्षय तृतीया के मौके पर देशभर में सोना-चांदी की जमकर खरीदारी हुई थी। व्यापारिक संगठन अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ ने इस दौरान लगभग 20,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान जताया था। लेकिन त्योहार की चमक के अगले ही दिन बाजार का रुख बदल गया।
बाजार खुलते ही कीमतों में बड़ी गिरावट
घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया पर जून डिलीवरी वाला सोना शुक्रवार के बंद भाव से करीब 1% नीचे कारोबार करता नजर आया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई।
क्यों टूटा सोना-चांदी?
वैश्विक परिस्थितियों ने इस गिरावट में अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। पहले जिस युद्धविराम से बाजार को राहत मिली थी, वह अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हुई है। साथ ही अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का दबाव
डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से सोना उन देशों के लिए महंगा हो जाता है, जहां दूसरी मुद्राएं चलती हैं। इसके अलावा अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में करीब 0.5% की बढ़ोतरी हुई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि निवेशकों को ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक लगने लगते हैं, जिससे बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग घट जाती है।
पहले ही गिर चुका है सोना
पिछले दो महीनों में सोने की कीमतों में करीब 8% की गिरावट आ चुकी है। फरवरी के अंत में मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव के बाद से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने-चांदी की दिशा पूरी तरह वैश्विक हालात और निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करेगी। अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो कीमतों में फिर उछाल आ सकता है, जबकि मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें गिरावट को जारी रख सकती हैं। कुल मिलाकर, त्योहार की चमक के बाद बाजार में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए संकेत है कि अब हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा।
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