Bhojshala verdict Hindu worship: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने धार स्थित भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे धार्मिक रूप से मां सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर माना है। अदालत के फैसले के बाद शनिवार सुबह से ही भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ASI द्वारा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज की दी गई अनुमति अब प्रभावी नहीं रहेगी। फैसले के बाद भोजशाला परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
HC के फैसले के बाद पूजा के लिए पहुंचे लोग
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि भोजशाला का विवादित स्थल धार्मिक रूप से मां सरस्वती यानी वाग्देवी को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। अदालत ने माना कि परिसर का ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप मंदिर का ही प्रतीत होता है, जिसके आधार पर हिंदू पक्ष को यहां पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गया। फैसले के बाद शनिवार सुबह से ही भोजशाला परिसर का माहौल बदल गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां सरस्वती मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है।
242 पन्ने के फैसले में HC ने ASI का दिया हवाला
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने 242 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप ‘मां वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर’ का है। अदालत ने वैज्ञानिक और पुरातात्विक साक्ष्यों का हवाला देते हुए माना कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा केंद्र और मंदिर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यहां हिंदू समुदाय की पूजा परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। अपने आदेश में अदालत ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद निर्माण के लिए जिले में वैकल्पिक भूमि आवंटन हेतु राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है।

