Gujarat News: गुजरात के कई जिलों में आज इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा चलाए जा रहे वोटर लिस्ट सुधार अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक अलग-अलग पोलिंग स्टेशनों पर तैनात रहे। इस विशेष कैंपेन का उद्देश्य था, वोटरों के नाम जुड़ाना, सुधार करना, पुराने नाम हटाना और नए पात्र वोटरों को पंजीकृत करना। लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल उलट नज़र आई। पूरे अभियान के दौरान BLO को लगातार तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
BLO हुए परेशान
कई BLO ने बताया कि सुबह से ही काम सुचारू रूप से नहीं चल पाया। सबसे बड़ी दिक्कत वोटरों के अधूरे फॉर्म और अधूरी जानकारी थी। एक BLO ने नाराज़गी जताते हुए कहा की लोग फॉर्म बिना पढ़े दे जाते हैं। आधे कॉलम खाली होते हैं, दस्तावेज भी नहीं जोड़ते। हमें बार-बार समझाना पड़ता है। समय बहुत कम है, काम बहुत ज्यादा। इसके अलावा आज नेट सर्वर के कई बार डाउन होने से पूरा प्रोसेस बार-बार रुकता रहा। BLO का कहना है कि सर्वर समस्या के चलते नाम जोड़ने और सुधार करने का काम बेहद धीमा रहा। सिस्टम ऑनलाइन नहीं चलता तो हम क्या करें? लोग लाइन में खड़े रहते हैं और हमें गुस्सा झेलना पड़ता है।
प्रशासन से बढ़ा दबाव
स्थानीय प्रशासन की तरफ़ से तय समय में अधिक से अधिक फॉर्म प्रोसेस करने का दबाव है। लेकिन जमीनी स्तर पर वास्तविकता अलग है। एक अन्य BLO ने कहा, फॉर्म का वेरिफिकेशन, डाटा एंट्री, दस्तावेज मिलान सब में कई घंटे लगते हैं। चार घंटे के इस कैंप में इतना काम सम्भव नहीं। अगर प्रशासन थोड़ा और समय दे तो काम साफ-सुथरा हो सकता है।
NEF भी उतरा समर्थन में
गढडा तालुका नेशनल एजुकेशनल फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी ने भी BLO की आवाज़ उठाई। उन्होंने साफ कहा, BLO की बातें बिल्कुल सही हैं। सर्वर डाउन, फॉर्म अधूरे और समय बेहद कम है। हमने इससे पहले भी सरकार को समय सीमा बढ़ाने के लिए पिटीशन दी थी।
क्या सुधरेगा सिस्टम?
लगातार बढ़ती शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि अभियान को सुचारू बनाने के लिए समय अवधि बढ़ाना और सिस्टम को स्थिर करना अनिवार्य है। अब नज़र चुनाव आयोग और प्रशासन के अगले कदम पर है, क्या BLO की आवाज़ सुनी जाएगी या फिर वोटर सुधार अभियान इसी अफरा-तफरी में आगे बढ़ेगा?
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