Delhi-NCR AQI: दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत इन दिनों भीषण वायु प्रदूषण की चपेट में है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि राजधानी और आसपास के इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है, जिसे “गंभीर” श्रेणी माना जाता है। हालात को देखते हुए स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने के आदेश दिए गए हैं और GRAP-4 लागू कर निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है।
खुले में सांस लेना खतरनाक
15 दिसंबर को लगातार तीसरे दिन दिल्ली का AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 460 के पार पहुंच चुका था। ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहर भी सबसे प्रदूषित इलाकों की सूची में टॉप पर रहे। इसका सीधा मतलब है, खुले में सांस लेना भी सेहत के लिए खतरनाक हो गया है।
दिलचस्प बात यह है कि 10 दिसंबर तक दिल्ली की हवा सिर्फ “खराब” श्रेणी में थी, लेकिन 12 दिसंबर के बाद हालात तेजी से बिगड़े। इसकी बड़ी वजह पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना, धीमी हवाएं और बादलों की मोटी चादर रही। इन परिस्थितियों में प्रदूषक तत्व हवा में ही फंसे रह गए और बाहर नहीं निकल पाए।
स्मॉग की कैद में दिल्ली
इस बार पराली जलाने की भूमिका बेहद कम रही, क्योंकि दिसंबर में खेतों में पराली नहीं जलाई जाती। इसके बावजूद प्रदूषण बढ़ा, जिससे साफ है कि मौसम ने अहम भूमिका निभाई। बीते दिनों सुबह-सुबह घना कोहरा भी प्रदूषण बढ़ाने वाला बड़ा कारक बना। सैटेलाइट तस्वीरों से भी साफ है कि 12 दिसंबर को उत्तर भारत के कई हिस्से घने कोहरे से ढके थे, जिससे हवा और जहरीली हो गई। नतीजा दिल्ली-NCR एक बार फिर स्मॉग की कैद में है और राहत की उम्मीद अब मौसम के बदलाव पर टिकी है।

