होम = Cover Story Latest = परीक्षा देने जा रहे थे भाई-बहन, चाचा और उसके बेटे ने लाठी डंडों से पीट पीटकर कर दी हत्या, ये थी वजह

परीक्षा देने जा रहे थे भाई-बहन, चाचा और उसके बेटे ने लाठी डंडों से पीट पीटकर कर दी हत्या, ये थी वजह

Sehore double murder: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। शुक्रवार सुबह, जब अधिकांश युवा अपनी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त थे, तब धरमपुरी गांव में दो निर्दोष भाई-बहनों की जिंदगी अचानक छिन गई। यह घटना जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर सिद्दीकगंज पुलिस थाना क्षेत्र में हुई, जहां परिवार के भीतर पुरानी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया।

भूमि विवाद की आग में जली दो मासूम जानें

20 वर्षीय शीतल मालवीय और उनके 19 वर्षीय भाई कुलदीप मालवीय परीक्षा केंद्र की ओर जा रहे थे। दोनों पढ़ाई में मेहनती थे और उस दिन महत्वपूर्ण परीक्षा देने के लिए घर से निकले थे। रास्ते में उनके चाचा हरिसिंह मालवीय और चचेरे भाई ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि दोनों ने लाठियों और डंडों से उन पर बेरहमी से हमला कर दिया। हमले इतना हिंसक था कि दोनों भाई-बहन गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

परिवार के भीतर छिपी पुरानी दुश्मनी

पुलिस अधीक्षक दीपक शुक्ला के अनुसार, यह क्रूरता लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद का नतीजा थी। पीड़ितों के पिता जगदीश मालवीय और आरोपी हरिसिंह मालवीय सगे भाई हैं। दोनों के बीच जमीन के बंटवारे को लेकर वर्षों से तनाव बना हुआ था। छोटी-छोटी बातें बढ़कर झगड़ों में बदल गईं और आखिरकार यह विवाद हिंसा में परिवर्तित हो गया। परिवार की एकता की बजाय संपत्ति की लालच ने दो युवा जीवन खत्म कर दिए।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। पीड़ितों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। जांच अधिकारी अतिरिक्त सबूत जुटा रहे हैं, जिसमें गवाहों के बयान और घटनास्थल से मिले सुराग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

समाज के लिए एक चेतावनी

यह घटना परिवारों में संपत्ति विवादों के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है। छोटे-छोटे मतभेद अगर समय रहते सुलझाए न जाएं, तो वे कभी भी हिंसा का रूप ले सकते हैं। पढ़ाई और सपनों की उम्र में दो युवाओं का इस तरह जाना पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करता है। उम्मीद है कि न्याय की प्रक्रिया तेजी से चलेगी और इस तरह की वारदातों को रोकने के लिए जागरूकता फैलेगी।