Cricket: विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाने वाले न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान केन विलियमसन ने इंग्लैंड दौरे के दौरान लॉर्ड्स टेस्ट समाप्त होने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। इससे पहले वह सीमित ओवरों के क्रिकेट से दूरी बना चुके थे और अब टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कहकर अपने 16 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत कर दिया है।
विलियमसन न्यूजीलैंड की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने अपने करियर में कुल 19,346 रन बनाए और 48 शतक जड़े।
पिछले कुछ दिनों में लगा कि यही सही समय है
संन्यास की घोषणा करते हुए केन विलियमसन ने कहा कि वह लंबे समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे और पिछले कुछ दिनों में उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के लिए खेलना हमेशा उनका सपना था और उन्होंने हर मैच में अपना शत-प्रतिशत देने की कोशिश की। विलियमसन ने कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें अपनी शर्तों पर संन्यास लेने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड टीम का भविष्य बेहद उज्ज्वल है और टीम में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। इस टीम का लंबे समय तक हिस्सा रहना उनके लिए गर्व की बात है और यह हमेशा उनके दिल के करीब रहेगा।
2019 विश्व कप में बने थे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
केन विलियमसन की कप्तानी में न्यूजीलैंड ने 2019 वनडे विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया था। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। इसके अलावा वह 2019 में आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर का पुरस्कार भी जीत चुके हैं। अगर उनके अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड की बात करें तो उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 9,515 रन, वनडे में 7,256 रन और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 2,575 रन बनाए। उनकी कप्तानी में न्यूजीलैंड ने पहली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब भी अपने नाम किया।
कप्तान के तौर पर भी शानदार रहा रिकॉर्ड
केन विलियमसन ने तीनों प्रारूपों में न्यूजीलैंड की कप्तानी की। उनकी अगुआई में टीम ने 40 टेस्ट मैचों में 22 जीत दर्ज की, जबकि 10 मुकाबले गंवाए और 8 मैच ड्रॉ रहे। वनडे में उन्होंने 91 मैचों में कप्तानी की, जिनमें न्यूजीलैंड को 46 में जीत और 40 में हार मिली। एक मैच टाई रहा, जबकि चार मुकाबले बेनतीजा रहे। टी20 अंतरराष्ट्रीय में विलियमसन ने 75 मैचों में कप्तानी की। इनमें टीम को 39 मुकाबलों में जीत मिली, 34 में हार का सामना करना पड़ा, एक मैच टाई रहा और एक मुकाबले का कोई नतीजा नहीं निकला।
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