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Delhi HC ने उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल दोबारा खोलने से किया इनकार

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए CBSE कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल दोबारा खोलने से इनकार कर दिया। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि 2 से 7 जून तक खुले रहे पोर्टल को फिर से शुरू करने से पूरी परिणाम प्रक्रिया करीब एक महीने पीछे चली जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि कोई छात्र व्यक्तिगत रूप से प्रभावित है तो वह अलग से कानूनी कदम उठा सकता है।

NSUI ने कुछ और दिनों के लिए पोर्टल खोलने की मांग की

NSUI की ओर से पेश वकील ने कुछ और दिनों के लिए पोर्टल दोबारा खोलने का अनुरोध किया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिन छात्रों को आपत्ति थी, वे पहले ही आवेदन कर चुके हैं और विवादित उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह याचिका सामान्य धारणाओं पर आधारित है और अगर मांग मान ली गई तो 17 लाख से अधिक छात्रों की स्नातक प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होगी।

पहले ही एक दिन बढ़ाई गई थी अंतिम तिथि

तुषार मेहता ने बताया कि पोर्टल की समय सीमा पहले ही एक दिन बढ़ाकर 7 जून तक की गई थी। उन्होंने कहा कि 1.67 लाख से अधिक छात्रों ने आवेदन किया है और लगभग 3.8 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की जांच चल रही है, जिससे स्पष्ट है कि पोर्टल सुचारु रूप से काम कर रहा था।

स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के लिए भी खोला गया था पोर्टल

उन्होंने बताया कि सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन से पहले 19 से 25 मई तक स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए अलग पोर्टल खोला गया था, जिसके तहत करीब चार लाख छात्रों ने 11 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की मांग की थी।

जुलाई में होगी अगली सुनवाई

NSUI के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने मामले को जुलाई में नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया। इससे पहले 8 जून को अदालत ने केंद्र और CBSE से जवाब मांगा था। याचिका में कक्षा 12 के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

मैनुअल जांच और नई गाइडलाइन की मांग

अधिवक्ता ऋषव रंजन के जरिए दायर याचिका में उत्तर पुस्तिकाओं की मैनुअल जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन की मांग की गई है। NSUI का कहना है कि इस साल परिणामों में गिरावट और तकनीकी शिकायतों ने OSM प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में कहा गया है कि स्कैनिंग दोष, मिलान त्रुटियों और अन्य तकनीकी खामियों से प्रभावित छात्रों को नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को अपर्याप्त बताते हुए भविष्य के डिजिटल मूल्यांकन के लिए नई गाइडलाइन, सुरक्षा उपाय और गायब या धुंधली उत्तर पुस्तिकाओं वाले छात्रों को अतिरिक्त अंक देने की भी मांग की गई है।

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