Chattisgarh: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सागौन की कीमती लकड़ी की तस्करी का एक अनोखा मामला सामने आया है। तस्कर बिल्कुल फिल्म ‘पुष्पा’ की तरह लकड़ी को अलग-अलग जगहों पर छिपाकर बाहर भेजने की तैयारी में थे। किसी ने तालाब के भीतर लकड़ियां छिपा रखी थीं, तो कुछ नदी किनारे दफ्न कर दी गई थीं। वहीं, कुछ लकड़ियां घरों के पीछे रखी गई थीं। हालांकि, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने उनकी इस योजना पर पानी फेर दिया।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जुड़ा है मामला
एजेंसी के अनुसार, यह पूरा मामला गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) क्षेत्र के साहेबिनकच्छार गांव का है। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि गांव में बड़ी मात्रा में अवैध रूप से सागौन की लकड़ी जमा करके रखी गई है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया।
खुफिया सूचना के बाद शुरू किया गया सर्च ऑपरेशन
वन विभाग को मिली सूचना के आधार पर पुलिस और वन विभाग की टीम गांव पहुंची और व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। जांच के दौरान सामने आई तस्वीर ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। तस्करों ने लकड़ी को खुले स्थानों पर रखने के बजाय अलग-अलग जगहों पर इस तरह छिपाकर रखा था कि किसी को उन पर आसानी से संदेह न हो।
तालाब, नदी किनारे और घरों के पीछे मिली लकड़ियां
छापेमारी के दौरान टीम को तालाब के अंदर छिपाई गई सागौन की लकड़ियां बरामद हुईं। इसके अलावा कुछ लकड़ियां नदी किनारे छिपाकर रखी गई थीं, जबकि कुछ घरों के पीछे जमा की गई थीं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया था ताकि वन विभाग और पुलिस की नजरों से बचा जा सके और मौका मिलने पर इन लकड़ियों को दूसरे स्थानों पर भेजा जा सके। तस्करों को शायद उम्मीद थी कि पानी के भीतर या सुनसान जगहों पर लकड़ी छिपाने से किसी को इसकी भनक नहीं लगेगी, लेकिन खुफिया सूचना के कारण उनकी पूरी योजना विफल हो गई।
क्यों इतनी कीमती होती है सागौन की लकड़ी?
सागौन, जिसे टीक वुड भी कहा जाता है, देश की सबसे मूल्यवान लकड़ियों में शामिल है। इसका इस्तेमाल फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां और कई महंगे निर्माण कार्यों में किया जाता है। बाजार में इसकी ऊंची कीमत होने के कारण इसकी अवैध कटाई और तस्करी के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं।
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