haridwar food controversy: हरिद्वार, जो धार्मिक दृष्टि से एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है, वहां खाने-पीने की वस्तुओं के नामों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ धार्मिक संगठनों और संत समाज की ओर से यह सुझाव या आग्रह किया गया कि ‘बिरयानी’ जैसे शब्दों के बजाय अधिक “सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त” नामों का उपयोग किया जाए। इसी के चलते कुछ ठेलों और खाने के स्टालों पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर लगाए जाने की बात सामने आई है।
नाम बदलने की प्रक्रिया और स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय दुकानदारों और ठेलेवालों के अनुसार, उन्हें अपने मेन्यू और बोर्ड पर बदलाव करने के लिए कहा गया, जिसके बाद कई जगह ‘बिरयानी’ शब्द हटाकर ‘वेज पुलाव’ या समान नाम लिखे गए। हालांकि, इस बदलाव को लेकर आम लोगों और व्यापारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं और स्थानीय परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अनावश्यक हस्तक्षेप भी बता रहे हैं।
विवाद का सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में खाद्य पदार्थों के नाम केवल व्यावसायिक पहचान होते हैं, लेकिन जब इन्हें धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है तो विवाद पैदा होना स्वाभाविक है। हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में पहले भी खान-पान और वेशभूषा से जुड़े नियमों और सुझावों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं।
स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि शहर की धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए कुछ नियम बनाए जा सकते हैं, जबकि दूसरा वर्ग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यापार से जोड़कर देखता है। ठेलेवालों का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ ग्राहकों को भोजन उपलब्ध कराना है, और नाम बदलने से उनके व्यवसाय पर भी असर पड़ सकता है।
हरिद्वार में ‘बिरयानी’ शब्द को लेकर उठा यह विवाद एक बार फिर परंपरा, संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर बहस को सामने लाता है। फिलहाल स्थिति स्थानीय स्तर पर चर्चा और बदलाव तक सीमित है, लेकिन इसने सामाजिक बहस को जरूर जन्म दे दिया है।

