देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। कई शहरों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। तेज धूप, गर्म हवाएं और उमस के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव फिलहाल बना रह सकता है। हालांकि, कुछ इलाकों में हवाओं की दिशा बदलने, आंशिक बादल छाने और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण आने वाले दिनों में तापमान में हल्की गिरावट संभव है।
47 डिग्री तापमान क्यों बन रहा है खतरनाक
जब तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंचता है, तो जमीन और वातावरण दोनों अत्यधिक गर्म हो जाते हैं। ऐसे में: शरीर से तेजी से पानी की कमी होती है, चक्कर, सिरदर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर अधिक असर पड़ता है, लंबे समय तक धूप में रहने से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
कब मिल सकती है गर्मी से राहत
मौसम की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ, नमी और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। कहीं-कहीं धूलभरी आंधी या हल्की बारिश से अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि, राहत की स्थिति क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। स्थानीय मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना उपयोगी रहेगा।
किन राज्यों में अधिक असर
आमतौर पर उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में मई-जून के दौरान हीटवेव की स्थिति अधिक देखी जाती है। मैदानी क्षेत्रों में दिन के समय तापमान अत्यधिक बढ़ सकता है।
हीटवेव से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं
लू लगना, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, तेज थकान,मांसपेशियों में ऐंठन,रक्तचाप में उतार-चढ़ाव । यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, भ्रम, बेहोशी या लगातार उल्टी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
गर्मी से बचने के उपाय
पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर नियमित अंतराल पर पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसे पेय लें।
दोपहर में बाहर निकलने से बचें: विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप से बचें।
हल्के कपड़े पहनें: ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े अधिक आरामदायक होते हैं।
पौष्टिक और हल्का भोजन करें: फल, सलाद और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें: इन पर गर्मी का असर अधिक हो सकता है।
क्या मानसून देगा राहत
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर जून में आगे बढ़ता है और इसके साथ कई क्षेत्रों में तापमान में कमी आती है। मानसून की प्रगति के साथ गर्मी का असर धीरे-धीरे कम हो सकता है।
47 डिग्री तक पहुंचता तापमान और हीटवेव लोगों के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। हालांकि, मौसम में बदलाव और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों को राहत मिल सकती है। तब तक सावधानी, पर्याप्त पानी और धूप से बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।
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