होम = Cover Story Latest = उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का निधन ,PM मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का निधन ,PM मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के सम्मानित नेताओं में शामिल भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपनी सादगी, ईमानदारी और प्रशासनिक दृढ़ता के लिए जाने जाते थे। नरेंद्र मोदी और द्रौपदी मुर्मू सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें राष्ट्रसेवा के लिए याद किया। भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके थे और बाद में सक्रिय राजनीति में आए। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अनुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी। उत्तराखंड की राजनीति में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

उत्तराखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री के रूप में बीसी खंडूरी ने सड़क, शिक्षा, प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया। उनकी कार्यशैली सख्त लेकिन जनहित केंद्रित मानी जाती थी।

PM मोदी ने क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें समर्पित जनसेवक बताते हुए कहा कि उनका जीवन अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण था। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने जताया दुख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बीसी खंडूरी ने सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया और उनकी सेवाओं को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

राजनीतिक जगत में शोक

बीसी खंडूरी के निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तराखंड के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें राज्य के विकास का मजबूत स्तंभ बताया। उनकी साफ-सुथरी छवि, सरल जीवनशैली और कठोर प्रशासनिक निर्णयों ने उन्हें जनता के बीच विशेष सम्मान दिलाया। लोग उन्हें सिद्धांतों पर चलने वाला नेता मानते थे।

उत्तराखंड के लिए बड़ी क्षति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीसी खंडूरी का निधन उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने प्रशासनिक ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल पेश की।

भुवन चंद्र खंडूरी का निधन भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने सेना से लेकर राजनीति तक अनुशासन, समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा की। उत्तराखंड के विकास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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