रविंद्र सिंह भाटी ने मंगलवार को राजस्थान के बाड़मेर में चल रहे आंदोलन के दौरान खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों, समर्थकों और स्थानीय लोगों की सतर्कता से बड़ी अनहोनी टल गई। इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर भारी हंगामा मच गया और पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
क्या है पूरा मामला
बाड़मेर के गिरल क्षेत्र में खनन परियोजना से जुड़े स्थानीय मजदूर और ड्राइवर लंबे समय से रोजगार और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पहले रोजगार दिया गया था, लेकिन बाद में काम से हटा दिया गया। इसी मुद्दे के समर्थन में विधायक रविंद्र भाटी भी पिछले कई दिनों से धरने में शामिल थे। मंगलवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वाहनों के काफिले के साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, तो माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
कैसे हुआ आत्मदाह का प्रयास
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक रविंद्र भाटी ने विरोध स्वरूप अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया। बताया जाता है कि वे आग लगाने की कोशिश करने वाले थे, लेकिन आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें रोक दिया। समय रहते कार्रवाई होने से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। सुरक्षा बढ़ा दी गई और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया। कुछ देर के लिए कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर हालात बेहद तनावपूर्ण रहे।
आंदोलन की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारी स्थानीय लोगों को रोजगार, विस्थापन से जुड़े मुद्दों के समाधान और खनन क्षेत्र से प्रभावित परिवारों के लिए उचित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वादों के बावजूद कई लोगों को स्थायी रोजगार नहीं मिला।
घटना के बाद राजनीतिक हलचल
इस घटना के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। समर्थक इसे जनहित के लिए उठाया गया कठोर कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं। घटना के बाद प्रशासन ने प्रति निधिमंडल से बातचीत की और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर चर्चा शुरू की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि संबंधित मुद्दों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा।
बाड़मेर में विधायक रविंद्र भाटी द्वारा आत्मदाह की कोशिश ने पूरे प्रदेश का ध्यान स्थानीय मजदूरों की मांगों की ओर खींच दिया है। समय रहते हस्तक्षेप होने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने आंदोलन की गंभीरता और क्षेत्र में बढ़ते असंतोष को उजागर कर दिया है।
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