PM Modi Urges Nation to Pause Gold Purchases: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक हालात और बढ़ते आयात दबाव को देखते हुए देशवासियों से अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है। भारत हर साल सैकड़ों टन सोना विदेशों से आयात करता है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटा प्रभावित होता है। ऐसे में पीएम मोदी की यह अपील सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी रणनीति मानी जा रही है। लेकिन अब इस पर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है।
राहुल ने कहा- देश चलाना मोदी के बस की बात नहीं
राहुल ने लिखा, ‘कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा। सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने के तेल का उपयोग घटाओ, मेट्रो से चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं हैं। ये विफलता हैं।’ उन्होंने कहा, ’12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है। क्या खरीदें, क्या नहीं। कहां जाए, कहां नहीं।’ दरअसल, रविवार को सिकंदराबाद में एक जनसभा में पीएम मोदी ने आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया था, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके और पर्यावरण की रक्षा हो सके।
PM मोदी ने क्या अपील की थी
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है और हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करता है। अगर लोग कम सोना खरीदेंगे तो देश का आयात बिल घटेगा, विदेशी मुद्रा बचेगी और रुपये पर दबाव कम होगा। इससे सरकार को अर्थव्यवस्था संभालने और घरेलू निवेश बढ़ाने में बड़ी मदद मिल सकती है। पीएम मोदी की अपील के पीछे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने की बड़ी वजह है। भारत बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से खरीदता है, जिसके लिए डॉलर खर्च करना पड़ता है। इससे व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपये पर दबाव पड़ता है। सरकार चाहती है कि लोग सोने की बजाय ऐसे सेक्टर में निवेश करें, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा मिले।
कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों ने बढ़ाई चिंता
पीएम मोदी की अपील के पीछे देश की आर्थिक स्थिरता को लेकर बड़ी चिंता जुड़ी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना विदेशों से आयात करता है और इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में गोल्ड इम्पोर्ट बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। वहीं, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज क्षेत्र की स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। इसके चलते भारत को तेल आयात पर करीब 30% ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर इसी दौरान सोने का आयात भी तेज रहा, तो देश के डॉलर भंडार पर दोहरी मार पड़ सकती है।

