FIFA World Cup Update: राजनीतिक तनाव, युद्ध की आशंकाओं और वीजा संबंधी चुनौतियों के बीच ईरान की फुटबॉल टीम आखिरकार फीफा वर्ल्ड कप के लिए मेक्सिको पहुंच गई है। टूर्नामेंट शुरू होने में अब सिर्फ चार दिन बाकी हैं और ऐसे में टीम का मेक्सिको पहुंचना बड़ी राहत माना जा रहा है। तुर्की के अंताल्या में तैयारी पूरी करने के बाद ईरानी खिलाड़ी रविवार को तिजुआना पहुंचे। टीम ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें साझा करते हुए “Hi Mexico” संदेश लिखा, जिससे साफ है कि अब उनका पूरा फोकस वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन पर है।
वीजा विवाद के बावजूद टीम ने पार की बड़ी बाधा
वर्ल्ड कप से पहले ईरानी टीम को वीजा और यात्रा संबंधी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। क्षेत्रीय तनाव और कड़े सुरक्षा नियमों के कारण खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। हालांकि, सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद टीम सफलतापूर्वक मेक्सिको पहुंच गई। तिजुआना पहुंचने के साथ ही ईरानी खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली और अब उनका पूरा ध्यान आगामी मुकाबलों की तैयारियों पर केंद्रित है।
वीजा विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
ईरान की वर्ल्ड कप तैयारियों के दौरान सबसे बड़ी चुनौती वीजा को लेकर सामने आई। टीम का शुरुआती प्रशिक्षण शिविर अमेरिकी राज्य एरिजोना में लगाने की योजना थी, लेकिन यात्रा प्रतिबंधों और सुरक्षा संबंधी शर्तों के चलते उसे बदलना पड़ा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया था कि खिलाड़ियों का स्वागत किया जाएगा, लेकिन सैन्य पृष्ठभूमि या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े लोगों को प्रवेश नहीं मिलेगा। इसी नीति के तहत ईरान फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष और पूर्व IRGC कमांडर मेहदी ताज सहित करीब एक दर्जन कोच, ट्रेनर और मेडिकल स्टाफ के वीजा आवेदन खारिज कर दिए गए, जिससे टीम की तैयारियों पर असर पड़ा।
मेक्सिको में तैयारी, अब मैदान पर नजर
अमेरिकी पाबंदियों के चलते ईरानी टीम का अभ्यास कैंप प्रभावित हुआ तो मई में मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने खेल भावना दिखाते हुए टीम को मेजबानी की पेशकश की। इसी मदद से ईरान ने वर्ल्ड कप की तैयारियां पूरी कीं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहे टूर्नामेंट में ग्रुप-जी की ईरानी टीम 15 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ अभियान शुरू करेगी, जबकि 21 जून को बेल्जियम और 26 जून को मिस्र से मुकाबला होगा। सीमित सपोर्ट स्टाफ और राजनीतिक दबाव के बीच अब सबकी नजर टीम के प्रदर्शन पर रहेगी।

