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चंबल में अवैध बजरी खनन पर बड़ा एक्शन, 16 घाटों पर पुलिस की मोबाइल टीमें तैनात

राजस्थान में चंबल नदी से हो रहे अवैध बजरी खनन को लेकर अब प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने कई जिलों में अवैध खनन और बजरी परिवहन पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू कर दी है। इसके तहत अब अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बड़ा एक्शन

राजस्थान सरकार ने धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में 15 मई 2026 से अवैध बजरी खनन के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। सुप्रीम Court ने चंबल क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कई विभागों के प्रमुख सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश भी दिए हैं।

वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध बजरी खनन से चंबल अभयारण्य के जलीय जीवों पर गंभीर असर पड़ रहा है। घड़ियाल, मगरमच्छ और गंगा डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जीवों का अस्तित्व खतरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि अवैध खनन रोकने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

27 जगहों पर CCTV से निगरानी

धौलपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने खनन रोकने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। जिले के 27 संवेदनशील मार्गों और स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि बजरी परिवहन पर नजर रखी जा सके। पुलिस, वन विभाग, परिवहन और खनन विभाग की संयुक्त टीमें अब STF के रूप में कार्रवाई करेंगी।

16 घाटों पर विशेष मोबाइल टीमें तैनात

प्रशासन ने चंबल नदी के 16 प्रमुख घाटों पर चौबीस घंटे निगरानी के लिए चार मोबाइल पार्टियां बनाई हैं। ये टीमें लगातार गश्त कर अवैध खनन और बजरी परिवहन पर रोक लगाएंगी। पुलिस अधिकारियों को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

अवैध परिवहन पर होगी FIR

परिवहन विभाग को साफ निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली या अन्य कृषि वाहन व्यावसायिक रूप से अवैध बजरी ढोते हुए पाया गया तो वाहन मालिक के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रशासन अब इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

हजारों परिवारों पर रोजगार का संकट

खनन पर पूरी तरह रोक लगने के बाद चंबल नदी किनारे बसे सैकड़ों गांवों के हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पीढ़ियों से उनकी आजीविका बजरी कारोबार पर निर्भर रही है।

सुरक्षित घाटों को वैध करने की मांग

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जिन घाटों पर वन्यजीवों को खतरा नहीं है, वहां वैज्ञानिक सर्वे के बाद सीमित और कानूनी खनन की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इससे सरकार को राजस्व मिलेगा और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी भी बची रहेगी।

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