होम = Breaking = फाल्टा में 285 बूथों पर मतदान जारी, TMC प्रत्याशी के हटते ही बढ़ी सियासी गर्मी; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

फाल्टा में 285 बूथों पर मतदान जारी, TMC प्रत्याशी के हटते ही बढ़ी सियासी गर्मी; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Falta bypoll 2026: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और ममता बनर्जी के 15 साल लंबे शासन के अंत के बाद राज्य की आखिरी बची फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार सुबह 7 बजे से पुनर्मतदान शुरू हो गया। मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा, लेकिन वोटिंग से ठीक पहले यहां बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। एआईटीएमसी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार जहांगीर खान ने 18 मई को अचानक चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया, जिससे फाल्टा का सियासी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ बोलने वाले जहांगीर ने छोड़ा मैदान, TMC पर उठे सवाल

चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान फाल्टा सीट के सबसे चर्चित चेहरों में रहे। उन्होंने फिल्म पुष्पा: द राइज़ के किरदार की तर्ज पर “पुष्पा झुकेगा नहीं” डायलॉग के जरिए खुद को दबंग नेता के रूप में पेश किया था। यहां तक कि उन्होंने पुलिस ऑब्जर्वर अजयपाल शर्मा को भी खुले मंच से चुनौती दी थी। लेकिन पुनर्मतदान की घोषणा और एआईटीएमसी की हार के बाद चुनाव मैदान छोड़ने के उनके फैसले से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में टीएमसी की किरकिरी हो रही है।

टीएमसी के एजेंट मतदान प्रक्रिया में नहीं हैं शामिल

चुनाव आयोग के अनुसार फाल्टा सीट पर नामांकन वापस लेने की कानूनी समय-सीमा पहले ही खत्म हो चुकी है, इसलिए ईवीएम से उम्मीदवार का नाम हटाना संभव नहीं है। ऐसे में मतदान मशीन पर टीएमसी का ‘जोड़ा फूल घास’ चुनाव चिन्ह और जहांगीर खान का नाम-फोटो पहले की तरह मौजूद रहेगा। हालांकि, टीएमसी की ओर से कोई पोलिंग एजेंट या कार्यकर्ता मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले रहा है। अब मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा और अन्य प्रत्याशियों के बीच माना जा रहा है।

धांधली के चलते 29 अप्रैल की वोटिंग हुई थी रद्द

इससे पहले फालता सीट पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण के तहत मतदान हुआ था, लेकिन चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप सामने आए। शिकायतों के मुताबिक कई पोलिंग बूथों पर बीजेपी के चुनाव चिन्ह ‘कमल’ वाले बटन पर जानबूझकर सेलोटेप चिपका दी गई थी, ताकि मतदाता बीजेपी को वोट न दे सकें। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संवेदनशील बूथों पर लाइव मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए वेब कैमरों के फुटेज और एंगल के साथ छेड़छाड़ की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल के मतदान को पूरी तरह रद्द कर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था।