बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. इस बार विवाद की वजह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का एक सोशल मीडिया पोस्ट बना है, जिसने जनता दल यूनाइटेड (JDU) और विपक्ष के बीच सियासी तनाव बढ़ा दिया है. एक तस्वीर को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब राजनीतिक आरोपों और सफाई तक पहुंच गया है.
दरअसल, आरजेडी ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जेडीयू एमएलसी दिनेश प्रसाद सिंह दिखाई दे रहे हैं. तस्वीर में दिनेश सिंह, संजय झा को एक सूटकेस देते नजर आ रहे हैं. इसी तस्वीर को शेयर करते हुए आरजेडी ने तंज कसते हुए लिखा कि मामला अब सिर्फ ‘थैली’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘सूटकेस और बोरे’ तक पहुंच गया है.
आरजेडी की इस पोस्ट ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया. इसकी वजह यह भी है कि हाल ही में पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने जेडीयू पर ‘थैली कल्चर’ यानी पैसे और रसूख के दम पर राजनीति चलाने के आरोप लगाए थे. आनंद मोहन ने दावा किया था कि पार्टी में टिकट और मंत्री पद योग्यता नहीं बल्कि पैसों और पहुंच के आधार पर दिए जाते हैं.
आरजेडी के इस पोस्ट को उन्हीं आरोपों को और हवा देने की कोशिश माना जा रहा है. सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल होने के बाद जेडीयू नेताओं और समर्थकों ने इसे विपक्ष की सस्ती राजनीति बताया और आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया.
विवाद बढ़ने के बाद जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने सोशल मीडिया पर सामने आकर पूरे मामले पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि तस्वीर को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. कोमल सिंह के मुताबिक यह तस्वीर 24 अप्रैल 2025 को मधुबनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित जनसभा की तैयारियों के दौरान आयोजित एनडीए कार्यकर्ताओं के सम्मेलन की है.
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के बाद एनडीए के कई वरिष्ठ नेता उनके घर भोजन के लिए पहुंचे थे, जहां मिथिला और बिहार की पारंपरिक संस्कृति के तहत मेहमानों को सम्मानपूर्वक विदाई उपहार दिए गए थे. कोमल सिंह ने दावा किया कि तस्वीर में दिखाई दे रहे सूटकेस में अंगवस्त्र और पारंपरिक उपहार रखे गए थे, न कि कोई संदिग्ध सामग्री.
उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता का समर्थन हासिल करने में असफल रहने के बाद विपक्ष तस्वीरों को तोड़-मरोड़कर पेश कर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सच्चाई सामने जरूर आएगी.
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आनंद मोहन और जेडीयू नेताओं के बीच पहले से ही राजनीतिक तनाव चल रहा है. जेडीयू के कई नेताओं ने हाल ही में आनंद मोहन पर ‘पुत्र मोह’ में राजनीति करने का आरोप लगाया था और उन्हें ‘धृतराष्ट्र’ तक कह दिया था.
अब आरजेडी के इस नए सोशल मीडिया हमले ने बिहार की राजनीति में चल रही बयानबाजी को और तेज कर दिया है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रंग पकड़ सकता है.

