Adhik Maas Shivratri 2026 Date: अधिकमास की मासिक शिवरात्रि को लेकर इस बार श्रद्धालुओं के बीच काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोग 13 जून को शिवरात्रि मान रहे हैं तो कुछ 14 जून को व्रत और पूजा करने की बात कर रहे हैं। दरअसल, हिंदू पंचांग में तिथि के आरंभ और समाप्ति के समय के कारण अक्सर ऐसी स्थिति बन जाती है। अधिकमास स्वयं में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इस दौरान आने वाली मासिक शिवरात्रि का महत्व सामान्य शिवरात्रि से भी अधिक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की उपासना, रुद्राभिषेक और व्रत करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
आखिर 13 जून या 14 जून, कब है अधिकमास शिवरात्रि
पंचांग गणना के अनुसार अधिकमास की मासिक शिवरात्रि का व्रत 13 जून 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून की शाम से प्रारंभ होकर 14 जून तक रहेगी। शिवरात्रि व्रत में निशिता काल और रात्रि पूजा का विशेष महत्व होने के कारण अधिकांश पंचांगों में 13 जून को ही अधिकमास शिवरात्रि मनाने का उल्लेख किया गया है।
अधिकमास शिवरात्रि का धार्मिक महत्व
अधिकमास लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। भगवान शिव के भक्तों के लिए अधिकमास की शिवरात्रि विशेष साधना और आराधना का अवसर मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से शिव पूजन करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात्रि में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। निशिता काल यानी मध्यरात्रि का समय भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। 13 जून की रात्रि में शिवलिंग का अभिषेक, मंत्र जाप और रुद्र पाठ विशेष लाभकारी माना जाएगा।
अधिकमास शिवरात्रि पूजा विधि
प्रातः स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
शिवलिंग का अभिषेक: भगवान शिव का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। इससे मन की शुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
रात्रि जागरण: शिवरात्रि पर रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व बताया गया है।
आरती और प्रसाद: पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
शिव चालीसा
शिव भक्त इस दिन शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं। मान्यता है कि शिव चालीसा के नियमित पाठ से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
शिव आरती
अधिकमास शिवरात्रि के अवसर पर भक्त भगवान शिव की प्रसिद्ध आरती “ॐ जय शिव ओंकारा” का गायन कर सकते हैं। आरती के बाद परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
अधिकमास की मासिक शिवरात्रि वर्ष 2026 में 13 जून को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव की आराधना, व्रत, अभिषेक और रात्रि पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में की गई शिव उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में शिव भक्तों के लिए यह अवसर भक्ति, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष पर्व है।

