Akshaya Tritiya Puja Shubh Muhurat Timing: हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और शुभ पर्वों में शामिल अक्षय तृतीया इस बार बेहद खास संयोग लेकर आ रही है। 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाने वाला यह पर्व अपने आप में अद्भुत माना जाता है, लेकिन इस बार पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त बेहद सीमित समय के लिए ही उपलब्ध है, जिसने श्रद्धालुओं की उत्सुकता और बढ़ा दी है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय मात्र 1 घंटा 32 मिनट का है। यह वही कालखंड है जब किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है।
जानें पूजा का सटीक शुभ समय
शुभ मुहूर्त: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
कुल अवधि: 1 घंटा 32 मिनट
तृतीया तिथि आरंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती। फिर भी यह विशेष समय अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
पूजा के दौरान रखें ये खास सावधानियां
इस पावन अवसर पर पूजा करते समय केवल विधि ही नहीं, बल्कि मन की पवित्रता भी बेहद जरूरी होती है।
घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखें
पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें
भगवान के नाम का ध्यान और जाप पूरे मन से करें
पीले फूल और घी का दीपक उपयोग करना शुभ माना जाता है
किसी से कटु वचन न बोलें, मधुर व्यवहार अपनाएं
इन छोटी-छोटी बातों का पालन करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
क्यों खास है अक्षय तृतीया?
‘अक्षय’ का अर्थ होता है जो कभी खत्म न हो। यही इस तिथि की सबसे बड़ी विशेषता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य, चाहे वह दान हो, पूजा हो या किसी की सहायता उसका फल जीवनभर साथ रहता है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और निस्वार्थ सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। इस दिन कमाया गया पुण्य भविष्य को उज्जवल बनाने की नींव रखता है।
मौका छोटा असर जीवनभर
अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और अनंत आशीर्वाद का द्वार है। इस बार का सीमित मुहूर्त इसे और भी खास बना रहा है। ऐसे में अगर आप भी अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति चाहते हैं, तो इस 92 मिनट के दिव्य समय को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।

