West Bengal Election News: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अपीलेट ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले किसी मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम आदेश देता है, तो उसका असर वोटिंग पर लागू होगा। अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे आदेशों को मतदान से पहले लागू करना अनिवार्य होगा।
21 अप्रैल को जारी होगी संशोधित वोटिंग लिस्ट
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि यदि अपीलों पर फैसला पहले चरण के विधानसभा चुनाव से पहले, यानी 21 अप्रैल 2026 तक हो जाता है, तो सप्लीमेंट्री संशोधित मतदाता सूची जारी करनी होगी। वहीं दूसरे चरण के मतदान के लिए यह समयसीमा 27 अप्रैल तय की गई है, ताकि पात्र मतदाताओं को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।
दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को
मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है। जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। कोर्ट के आदेश के अनुसार वोटिंग से दो दिन पहले भी यदि ट्रिब्यूनल अपील स्वीकार कर लेता है, और नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम आदेश देता है, तो उसे मतदान से पहले लागू करना होगा।
अपील लंबित होने पर नहीं मिलेगा वोटिंग का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अपील लंबित होने के आधार पर किसी को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि लंबित अपील वाले लोगों को वोट देने की अनुमति दी गई, तो आपत्ति करने वाले पक्ष भी अन्य मतदाताओं के अधिकार रोकने की मांग कर सकते हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

