Strait of Hormuz: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में दावा किया गया है कि ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक भारतीय जहाज को बीच रास्ते में रोककर वापस लौटने का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि ईरान की इस कार्रवाई के पीछे अमेरिका के साथ चल रहा तनाव और आर्थिक नाकाबंदी मुख्य कारण है, जिसके विरोध में इस अहम समुद्री मार्ग पर फिर से सख्ती बढ़ा दी गई है।
ऑडियो में कैद हुआ पूरा संवाद
सामने आए ऑडियो में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना का एक अधिकारी भारतीय जहाज के कप्तान को साफ निर्देश देता सुनाई दे रहा है “यह मार्ग अभी बंद है, आप तुरंत वापस लौट जाएं।” इस पर भारतीय कप्तान शांत अंदाज में जवाब देता है “आपका संदेश समझ लिया गया है, हम लौट रहे हैं।” इसके बाद जहाज ने अपना रास्ता बदल लिया। ‘भाग्य लक्ष्मी’ नाम के इस जहाज के चालक दल ने यह पूरा संवाद साझा किया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होरमज फिर बना तनाव का केंद्र
दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक तनाव के केंद्र में आ गया है। ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में इस मार्ग पर कड़ा नियंत्रण शुरू कर दिया है। हालांकि, हाल ही में लेबनान और इजरायल के बीच युद्धविराम के बाद यह रास्ता कुछ समय के लिए खुला था और कई जहाजों ने सुरक्षित आवाजाही भी की थी, लेकिन अब हालात फिर बदलते नजर आ रहे हैं।
बिना अनुमति नहीं गुजरेंगे जहाज
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अब इस मार्ग से गुजरने के लिए सभी जहाजों को IRGC के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा। जमीनी हालात को देखते हुए यह भी संकेत मिल रहे हैं कि इस क्षेत्र में फैसले सीधे IRGC के स्तर पर लिए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
भारत ने जताई कड़ी नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। ईरान के राजदूत को तलब कर भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। भारत के लिए यह मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा तेल आयात इसी रास्ते से होता है।
बढ़ता तनाव बढ़ती चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ती सख्ती और इस तरह की घटनाएं वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे या फिर हालात और बिगड़ेंगे।
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