सर्दियों और प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच स्मॉग एक बार फिर गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आग की लपटों से ज्यादा खतरनाक अक्सर उसका धुआं होता है, क्योंकि यह बिना दिखे शरीर के अंदर जाकर सांस लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार स्मॉग में मौजूद जहरीले कण कुछ ही मिनटों में फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। दिल्ली-NCR सहित कई बड़े शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है, जिससे सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
स्मॉग क्या है और क्यों है इतना खतरनाक
स्मॉग धुआं और कोहरे का मिश्रण होता है, जिसमें PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण मौजूद होते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह कण शरीर की ऑक्सीजन लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं और धीरे-धीरे शरीर के अंदर सूजन पैदा कर सकते हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी: कुछ मिनटों में हो सकता है गंभीर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा समय तक स्मॉग के संपर्क में रहने से सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, गले में खराश और सीने में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह अस्थमा के मरीजों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
स्मॉग शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है
स्मॉग में मौजूद जहरीले कण शरीर के अंदर जाकर कई अंगों को प्रभावित करते हैं।
यह फेफड़ों में जाकर ऑक्सीजन के प्रवाह को कम करता है
रक्त में मिलकर हृदय पर दबाव बढ़ा सकता है
लंबे समय तक संपर्क से फेफड़ों की क्षमता घट सकती है
आंखों और त्वचा में जलन पैदा कर सकता है
डॉक्टरों के अनुसार लगातार प्रदूषित हवा में रहना धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देता है।
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा
स्मॉग का असर सभी पर पड़ता है, लेकिन कुछ लोग विशेष रूप से अधिक जोखिम में रहते हैं।
छोटे बच्चे
बुजुर्ग लोग
अस्थमा और एलर्जी के मरीज
दिल और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग
खुले में काम करने वाले मजदूर
इन लोगों को स्मॉग के दिनों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रशासन द्वारा कई कदम उठाए जाते हैं, जैसे वाहनों पर नियंत्रण, निर्माण कार्यों पर निगरानी और औद्योगिक प्रदूषण पर रोक। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत बदलाव और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत है।
स्मॉग सिर्फ एक मौसमी समस्या नहीं बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार धुआं और प्रदूषित हवा धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर कर सकते हैं और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। ऐसे में जागरूकता, सावधानी और पर्यावरण संरक्षण ही इसका सबसे प्रभावी समाधान है।
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