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‘पीरियड नहीं होगा तो बच्चे कैसे होंगे?’ सबा आजाद ने ट्रोल्स को दिया करारा जवाब

अभिनेत्री और सिंगर Saba Azad ने महिलाओं की सेहत और पीरियड्स को लेकर समाज में फैली गलतफहमियों पर खुलकर अपनी बात रखी है। हाल ही में उन्होंने बताया कि उन्हें कई बार ऐसे ताने सुनने पड़े कि अगर किसी महिला को नियमित पीरियड्स नहीं होते, तो वह मां नहीं बन सकती। सबा ने इन धारणाओं को गलत बताते हुए कहा कि महिलाओं की हेल्थ से जुड़े मुद्दों को समझने की जरूरत है, न कि उन पर बिना जानकारी के टिप्पणी करने की। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर पीरियड्स, हार्मोनल हेल्थ और महिलाओं की प्रजनन क्षमता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

क्या कहा सबा आजाद ने

सबा आजाद ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें लंबे समय तक हार्मोनल और पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान कई लोगों ने उन्हें सलाह देने के नाम पर ऐसी बातें कहीं, जो वैज्ञानिक रूप से सही नहीं थीं। उन्होंने कहा कि कई लोग यह मान लेते हैं कि अगर किसी महिला का पीरियड साइकिल सामान्य नहीं है, तो वह कभी मां नहीं बन सकती, जबकि यह पूरी तरह सच नहीं है। सबा ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है और हर समस्या को शर्म या डर की नजर से नहीं देखना चाहिए।

पीरियड्स और प्रेग्नेंसी को लेकर फैले भ्रम

विशेषज्ञों के अनुसार समाज में आज भी पीरियड्स और महिलाओं की प्रजनन क्षमता को लेकर कई मिथक मौजूद हैं।
आम गलतफहमियां, अनियमित पीरियड्स का मतलब हमेशा बांझपन नहीं होता, हर महिला का हार्मोनल सिस्टम अलग होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि केवल पीरियड्स के आधार पर किसी महिला की फर्टिलिटी तय नहीं की जा सकती।

महिलाओं की हेल्थ पर खुलकर बात करना क्यों जरूरी

सबा आजाद ने यह भी कहा कि आज भी कई महिलाएं पीरियड्स या हार्मोनल समस्याओं पर खुलकर बात करने में झिझक महसूस करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं सही समय पर इलाज नहीं करा पातीं।
किन बातों पर ध्यान जरूरी
अनियमित पीरियड्स होने पर डॉक्टर से सलाह लें
इंटरनेट की अधूरी जानकारी पर भरोसा न करें

मनोरंजन जगत में बढ़ रही जागरूकता

पिछले कुछ वर्षों में कई कलाकार महिलाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात कर रहे हैं। सबा आजाद का बयान भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि सेलिब्रिटीज की बातों का असर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचता है।

समाज में सोच बदलने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की हेल्थ को लेकर शर्म और मिथकों की जगह वैज्ञानिक जानकारी और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना जरूरी है। आज भी कई महिलाएं केवल सामाजिक दबाव या गलत धारणाओं के कारण मानसिक तनाव का सामना करती हैं। ऐसे में सही जानकारी और खुली बातचीत बेहद जरूरी मानी जाती है।

सबा आजाद ने पीरियड्स और महिलाओं की प्रजनन क्षमता को लेकर फैली कई गलतफहमियों पर सवाल उठाकर एक महत्वपूर्ण चर्चा को आगे बढ़ाया है। उनका बयान यह याद दिलाता है कि महिलाओं की हेल्थ को लेकर जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और संवेदनशील व्यवहार बेहद जरूरी है। समाज में फैले मिथकों को तोड़ने और सही जानकारी पहुंचाने के लिए खुलकर बातचीत करना समय की मांग बन चुका है।

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