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छठ महापर्व: आस्था के साथ सेहत का संदेश, प्रसाद बनता है ‘स्वास्थ्य का प्रसाद’

Chhath festival : भक्ति और श्रद्धा का चारदिवसीय पर्व छठ इस वर्ष शनिवार से आरंभ हो रहा है। सूर्य उपासना का यह पर्व जहां धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है, वहीं स्वास्थ्य के लिहाज से भी इसका महत्व कम नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि छठ में अर्पित किया जाने वाला प्रसाद सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर को रोगों से बचाने वाला ‘प्राकृतिक अमृत’ है।

प्रसाद के हर अंश में छिपा स्वास्थ्य लाभ

तिलकामांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा के अनुसार, छठ पूजा में अर्पित किए जाने वाले सभी प्रसादों का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रसाद में केला, गन्ना, नारियल, ठेकुआ और आंवला जैसे प्राकृतिक तत्व शामिल होते हैं।

उन्होंने बताया कि सर्दियों के मौसम में केला बच्चों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है, क्योंकि यह पेट और गैस से जुड़ी परेशानियों को दूर करता है। सूर्य की कृपा से फसलें तैयार होती हैं, इसलिए नई फसल का प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला प्रसाद

पंडित आनंद झा ने आगे बताया कि गन्ना शरीर को ऊर्जा देता है, वहीं नारियल में मौजूद पोषक तत्व इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं और सर्दी-जुकाम से रक्षा करते हैं। ठेकुआ, जो आटे और गुड़ से तैयार किया जाता है, ठंड के मौसम में शरीर को गर्मी प्रदान करता है और स्वास्थ्यवर्धक होता है।

संकट मोचन दरबार के पंडित चंद्रशेखर झा ने कहा कि प्रसाद में आंवला और हल्दी का विशेष महत्व है। आंवला डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए वरदान माना जाता है, जबकि हल्दी प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह कार्य करती है और संक्रमण से बचाव करती है।

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वहीं जगन्नाथ मंदिर के पंडित सौरभ कुमार मिश्रा के अनुसार, छठ प्रसाद में शामिल डाभ (नारियल पानी) और नींबू शरीर को बदलते मौसम में बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं।

डॉक्टरों की नजर में छठ प्रसाद

फिजिशियन डॉ. का कहना है कि छठ के प्रसाद में चढ़ाए जाने वाले हर फल का अपना अलग स्वास्थ्य लाभ होता है। सिंघाड़ा शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता, जबकि नारियल पानी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है।

आस्था के साथ स्वास्थ्य का संतुलन

छठ पर्व इस बात का प्रतीक है कि भारतीय परंपराओं में सिर्फ भक्ति नहीं, बल्कि जीवनशैली और स्वास्थ्य के गहरे संदेश भी समाए हैं। प्रकृति से जुड़ाव, स्वच्छता, उपवास और संतुलित आहार के माध्यम से यह पर्व शरीर और मन दोनों को शुद्ध करने का अवसर प्रदान करता है।