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प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर चेक कराना क्यों है बेहद जरूरी? जानिए मां और बच्चे की सुरक्षा का राज

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं। इस समय Blood Pressure यानी रक्तचाप की नियमित जांच मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। बीपी में असामान्य बदलाव कई बार ऐसी स्थितियों का संकेत हो सकते हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देना जरूरी होता है। प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोनल परिवर्तन, रक्त की मात्रा में वृद्धि और शरीर पर बढ़ता दबाव रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है। कुछ महिलाओं में रक्तचाप सामान्य रहता है, जबकि कुछ में हाई बीपी की समस्या विकसित हो सकती है।

हाई बीपी से क्या जोखिम हो सकते हैं

यदि गर्भावस्था में रक्तचाप बहुत अधिक बढ़ जाए, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इससे प्लेसेंटा तक रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। Preeclampsia जैसी स्थिति में हाई बीपी के साथ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है

नियमित बीपी जांच के फायदे
रक्तचाप में बदलाव का समय पर पता चलता है। संभावित जटिलताओं की पहचान जल्दी हो सकती है, डॉक्टर जरूरत के अनुसार निगरानी और उपचार की योजना बना सकते हैं। मां और शिशु की सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

यदि गर्भवती महिला को तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना, चेहरे या हाथों में अचानक सूजन, तेज पेट दर्द या असामान्य बेचैनी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बीपी कब-कब चेक कराना चाहिए

आमतौर पर प्रत्येक प्रसवपूर्व जांच (एंटीनैटल चेकअप) में रक्तचाप मापा जाता है। यदि डॉक्टर को विशेष चिंता हो, तो घर पर भी नियमित मॉनिटरिंग की सलाह दी जा सकती है।

कब तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें

यदि बीपी बहुत अधिक आए या ऊपर बताए गए चेतावनी संकेत दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सा सहायता लें।

गर्भावस्था में नियमित ब्लड प्रेशर जांच मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। समय पर निगरानी से संभावित समस्याओं का जल्दी पता लगाया जा सकता है और आवश्यक उपचार शुरू किया जा सकता है। नियमित डॉक्टर परामर्श और सावधानी से सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बेहतर कदम उठाया जा सकता है।

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