सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इसे अधिक मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान पूजा-पाठ, दान, जप और साधना का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में भी पुरुषोत्तम मास को बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक रखना चाहिए। कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और परिवार की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है। आइए जानते हैं कि पुरुषोत्तम मास में किन 4 चीजों को घर में रखने से बचना चाहिए।
पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व
पुरुषोत्तम मास लगभग हर तीन वर्ष में आता है। हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य संक्रांति के बिना एक अतिरिक्त चंद्र मास जुड़ता है, तब अधिक मास बनता है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस माह को भगवान विष्णु ने अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया था। इसलिए इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान लोग व्रत, कथा, दान और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। साथ ही वास्तु नियमों का पालन करना भी शुभ माना जाता है।
घर में टूटा हुआ कांच या शीशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार टूटे हुए कांच, शीशे या दरार वाले दर्पण को घर में रखना अशुभ माना जाता है। पुरुषोत्तम मास में ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।
क्या हो सकता है प्रभाव
घर में मानसिक तनाव बढ़ सकता है, परिवार के सदस्यों के बीच विवाद बढ़ सकते हैं,आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, यदि घर में टूटा हुआ शीशा या कांच पड़ा है तो उसे तुरंत हटाना बेहतर माना जाता है।
बंद या खराब घड़ी
वास्तु में बंद घड़ी को रुकी हुई प्रगति का प्रतीक माना गया है। पुरुषोत्तम मास जैसे पवित्र समय में खराब घड़ी घर में रखना शुभ नहीं माना जाता।
वास्तु के अनुसार इसके दुष्प्रभाव
कामों में रुकावट आने लगती है, सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है।
कबाड़ और बेकार सामान
पुरुषोत्तम मास में घर की साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष महत्व होता है। घर में पुराने, टूटे या बेकार सामान का ढेर लगाना वास्तु दोष का कारण माना जाता है।
सूखे या कांटेदार पौधे
वास्तु शास्त्र में सूखे पौधों को नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। पुरुषोत्तम मास में घर के अंदर सूखे, मुरझाए या कांटेदार पौधे रखना शुभ नहीं माना जाता।
किन पौधों से बचना चाहिए
सूखे गमले, कांटेदार पौधे।
पुरुषोत्तम मास में क्या करना शुभ माना जाता है
भगवान विष्णु की पूजा
दान-पुण्य करें
घर में साफ-सफाई रखें
सात्विक जीवन अपनाएं
इस दौरान क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
क्या कहता है वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का वातावरण व्यक्ति की मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति पर प्रभाव डालता है। पुरुषोत्तम मास में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए घर को स्वच्छ, शांत और व्यवस्थित रखना जरूरी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस महीने में किए गए अच्छे कार्य कई गुना फल देते हैं। इसलिए घर के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाए रखना लाभकारी माना जाता है।
पुरुषोत्तम मास को भक्ति, साधना और सकारात्मकता का महीना माना जाता है। इस दौरान घर में टूटी वस्तुएं, बंद घड़ी, कबाड़ और सूखे पौधे रखने से बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ये चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं और घर की सुख-शांति प्रभावित कर सकती हैं। यदि इस पवित्र महीने में साफ-सफाई, पूजा-पाठ और सकारात्मक वातावरण बनाए रखा जाए तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहता है।
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