हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके परिवार की ओर से अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने ग्रहण किया। इस दौरान समारोह का माहौल बेहद भावुक हो गया, जब उनकी बेटी अहाना देओल खुद को संभाल नहीं सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं। देश की राजधानी में आयोजित इस सम्मान समारोह में कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। जैसे ही धर्मेंद्र का नाम मंच से लिया गया, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह पल परिवार और उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए बेहद भावुक और गर्व से भरा रहा।
भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ को मिला बड़ा सम्मान
धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा में दशकों तक अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज किया। रोमांटिक हीरो से लेकर एक्शन स्टार तक, उन्होंने हर किरदार को यादगार बनाया। फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान को देखते हुए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित करने का फैसला लिया। इसे भारतीय सिनेमा के प्रति उनकी असाधारण सेवाओं का सम्मान माना जा रहा है।
सम्मान लेते वक्त भावुक दिखीं हेमा मालिनी
समारोह के दौरान हेमा मालिनी जब मंच पर सम्मान लेने पहुंचीं तो उनके चेहरे पर गर्व और भावुकता दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। उन्होंने सम्मान ग्रहण करते समय हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन किया। मौजूद लोगों ने भी तालियों के जरिए Dharmendra को श्रद्धांजलि दी। कई लोगों ने इस पल को भारतीय सिनेमा के इतिहास का यादगार क्षण बताया।
बेटी अहाना की आंखें हुईं नम
समारोह में मौजूद अहाना देओल अपने पिता को मिले इस सम्मान को देखकर भावुक हो गईं। कैमरों में उनकी नम आंखें कैद हो गईं, जिसने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। फैंस ने कहा कि यह सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि एक युग को दी गई श्रद्धांजलि है।
धर्मेंद्र का फिल्मी सफर क्यों रहा खास
धर्मेंद्र ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, संवाद शैली और सादगी ने उन्हें आम दर्शकों से खास जुड़ाव दिलाया। उन्होंने एक्शन, रोमांस, पारिवारिक और सामाजिक हर तरह की फिल्मों में शानदार अभिनय किया। यही वजह है कि उन्हें हिंदी सिनेमा का ‘ही-मैन’ कहा जाता है।
धर्मेंद्र को मिला मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर को सम्मान देने जैसा है। हेमा मालिनी और अहाना का भावुक होना यह दिखाता है कि यह सम्मान सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि एक महान कलाकार की विरासत को सलाम है।
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