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अखिलेश यादव की नई चुनावी रणनीति ‘प्लान 75’ से यूपी की राजनीति में हलचल

Akhilesh Yadav Plan 75: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का कथित ‘प्लान 75’ इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि इस रणनीति के जरिए समाजवादी पार्टी उन जिलों और विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर रही है, जहां वह अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है। आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी संगठन को धार देने और अपने जनाधार को विस्तार देने की दिशा में लगातार सक्रिय नजर आ रही है।

क्या है अखिलेश यादव का ‘प्लान 75’

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के साथ गठबंधन का लाभ उठाने वाली समाजवादी पार्टी अब विधानसभा चुनाव 2027 में खुद को विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे और गठबंधन के बड़े भाई की भूमिका में देख रही है। ऐसे में ‘प्लान 75’ को सपा की दीर्घकालिक चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस योजना के तहत पार्टी प्रदेश के अधिकांश जिलों में संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और गैर-भाजपा वोटों को अपने पक्ष में एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

पीडीए समीकरण को धार देने में जुटी सपा

समाजवादी पार्टी नेतृत्व लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। पार्टी का मानना है कि इस सामाजिक समीकरण के जरिए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पकड़ को और मजबूत कर सकती है। इसी रणनीति के तहत सपा संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों में जुटी हुई है।

कांग्रेस के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती

सपा की इसी रणनीति को कांग्रेस के लिए संभावित चुनौती के तौर पर भी देखा जा रहा है। यदि विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी अधिकतर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला करती है, तो कांग्रेस के लिए सम्मानजनक सीटों की मांग करना आसान नहीं होगा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन का लाभ मिला था, लेकिन विधानसभा चुनाव की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। आमतौर पर क्षेत्रीय दल विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी की मांग करते हैं और यही स्थिति भविष्य में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस पैदा कर सकती है।

सीटों के गणित पर बढ़ सकती है खींचतान

समाजवादी पार्टी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की सबसे मजबूत स्थिति उसी के पास है। दूसरी ओर कांग्रेस राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने और खोया जनाधार वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के राजनीतिक हित कई मुद्दों पर एक-दूसरे से टकरा सकते हैं। खासतौर पर सीट बंटवारे और नेतृत्व की भूमिका को लेकर भविष्य में मतभेद उभरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

2027 के करीब आते ही साफ होगी तस्वीर

हालांकि विधानसभा चुनाव 2027 में अभी काफी समय बाकी है और इंडिया गठबंधन की तस्वीर भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन राजनीतिक संकेत यह जरूर बता रहे हैं कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, सीटों के गणित, नेतृत्व और गठबंधन की शर्तों को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का ‘प्लान 75’ केवल भाजपा को चुनौती देने की रणनीति भर नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के लिए भी एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में विपक्ष की राजनीति का केंद्र बनने की दावेदारी समाजवादी पार्टी ही करना चाहती है।

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