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Keralam में शिगेला Outbreak! जानिए क्या है शिगेला संक्रमण

by | Jun 11, 2026 | Cover Story Latest

केरल में हाल ही में सामने आए शिगेला संक्रमण (Shigella Infection) के मामलों, जिनसे कई जिलों के स्कूली बच्चे प्रभावित हुए हैं, ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है। दूषित भोजन, पानी और खराब स्वच्छता के कारण फैलने वाला यह अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण एक बार फिर चर्चा में है।

हालांकि अधिकांश मामलों में दस्त, बुखार और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार शिगेलोसिस (Shigella बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी) बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है।

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जतिन आहूजा ने संक्रमण के लक्षण, जांच, इलाज और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी है।

क्या है शिगेला संक्रमण?

शिगेला बैक्टीरिया का एक समूह है, जो आंतों में संक्रमण पैदा करता है और इसे शिगेलोसिस कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पाचन तंत्र को प्रभावित करता है और मल-मुख (Fecal-Oral) मार्ग के जरिए फैलता है। संक्रमण आमतौर पर दूषित भोजन, पानी, संक्रमित सतहों या बिना हाथ धोए भोजन करने के कारण फैलता है। बहुत कम संख्या में बैक्टीरिया भी संक्रमण फैलाने के लिए पर्याप्त होते हैं, इसलिए यह बीमारी बेहद संक्रामक मानी जाती है। स्कूलों, डे-केयर सेंटरों, घरों और खराब स्वच्छता वाले क्षेत्रों में इसके फैलने का खतरा अधिक रहता है।

शिगेलोसिस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

शिगेलोसिस में आमतौर पर अचानक दस्त, बुखार, पेट में ऐंठन और बार-बार शौच की तीव्र इच्छा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। अन्य प्रकार के गैस्ट्रोएंटेराइटिस की तुलना में इसमें दस्त के साथ खून या बलगम भी आ सकता है, क्योंकि संक्रमण आंतों की परत में सूजन पैदा करता है। रोगियों को शौच के दौरान दर्द और पेट में गंभीर असहजता भी महसूस हो सकती है। बुखार, कम मात्रा में बार-बार दस्त और मल में खून या बलगम की मौजूदगी शिगेला संक्रमण की आशंका को बढ़ाती है।

शिगेला संक्रमण की पहचान कैसे की जाती है?

इस बीमारी का प्रारंभिक निदान लक्षणों के आधार पर किया जाता है, लेकिन इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से की जाती है। स्टूल कल्चर (मल परीक्षण) शिगेला बैक्टीरिया की पहचान और एंटीबायोटिक के प्रति उसकी संवेदनशीलता जानने का मानक तरीका है। पीसीआर (PCR) जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट तेजी से परिणाम देने में मदद करते हैं और प्रकोप के दौरान या जल्द निदान की आवश्यकता होने पर काफी उपयोगी साबित होते हैं। गंभीर दस्त, खून वाले मल, लंबे समय तक बीमारी रहने, संभावित प्रकोप या जटिलताओं के ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में जांच कराने की सलाह दी जाती है।

शिगेला संक्रमण का इलाज कैसे किया जाता है?

अधिकांश मरीजों में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति के साथ सहायक उपचार (Supportive Care) की आवश्यकता होती है। गंभीर बीमारी, तेज बुखार, खून वाले दस्त, लंबे समय तक लक्षण बने रहने या जटिलताओं के ज्यादा जोखिम वाले लोगों में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक का चयन स्थानीय दवा-प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) और लैब जांच के आधार पर किया जाना चाहिए, क्योंकि कई क्षेत्रों में शिगेला की दवा-प्रतिरोधी प्रजातियां तेजी से बढ़ रही हैं।

किन जटिलताओं का खतरा रहता है?

इस संक्रमण की सबसे सामान्य जटिलता शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) है, जो अत्यधिक तरल पदार्थ के नुकसान के कारण होती है। बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। कुछ मामलों में यह संक्रमण दौरे पड़ने (Seizures), आंतों में गंभीर सूजन, रक्त संक्रमण (Bloodstream Infection) और रिएक्टिव आर्थराइटिस जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में लंबे समय तक बीमारी रहने और गंभीर संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है।

केरल में मामलों में बढ़ोतरी के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार पीने के पानी का दूषित होना, खराब स्वच्छता व्यवस्था, भीड़भाड़ और हाथों की साफ-सफाई में लापरवाही संक्रमण के बढ़ने के प्रमुख कारण हो सकते हैं। भारी बारिश और बाढ़ जैसे मौसमी कारक भी जलजनित संक्रमणों के प्रसार को बढ़ावा देते हैं। शिगेला संक्रमण अक्सर समूहों में फैलता है और स्कूल जाने वाले बच्चों, एक ही घर में रहने वाले परिवारों और साझा शौचालय व स्वच्छता सुविधाओं का उपयोग करने वाले समुदायों में तेजी से फैल सकता है।

संक्रमण को रोकने के लिए क्या हैं जरूरी उपाय?

विशेषज्ञों के अनुसार शिगेला संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वच्छता और साफ-सफाई बेहद महत्वपूर्ण है। शौचालय के इस्तेमाल के बाद और भोजन बनाने या खाने से पहले साबुन से नियमित रूप से हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इसके अलावा सुरक्षित पेयजल, सीवेज के उचित निपटान और भोजन को सुरक्षित तरीके से तैयार करना भी जरूरी है। प्रकोप के दौरान संक्रमित लोगों की जल्द पहचान, समय पर चिकित्सा जांच, लक्षण वाले लोगों को अस्थायी रूप से स्कूल या खाद्य पदार्थों से जुड़े कामों से दूर रखना और जन-जागरूकता अभियान चलाना संक्रमण के प्रसार को रोकने और संवेदनशील आबादी की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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