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पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान का डिजिटल खेल बेनकाब, TRF के दावों पर उठे सवाल

पहलगाम हमले के बाद डिजिटल मोर्चे पर बढ़ी जांच जम्मू-कश्मीर के Pahalgam में हुए आतंकी हमले के बाद सिर्फ सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं, बल्कि साइबर और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं। जांच के दौरान यह दावा सामने आया कि हमले के बाद सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संगठित तरीके से प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक कुछ ऑनलाइन अकाउंट और नेटवर्क ऐसे नैरेटिव को बढ़ावा दे रहे थे, जिनका उद्देश्य भ्रम फैलाना और माहौल को प्रभावित करना था। इसी दौरान आतंकी संगठन TRF के दावों और डिजिटल गतिविधियों को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए।

क्या है TRF और क्यों चर्चा में आया

The Resistance Front यानी TRF पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर से जुड़ी कई घटनाओं के बाद चर्चा में आता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि यह संगठन ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करके अपने संदेश और दावे तेजी से फैलाने की कोशिश करता है। विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक आतंकवादी नेटवर्क अब सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय रहते हैं। इसी वजह से किसी भी घटना के बाद सोशल मीडिया गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।

जांच में क्या सामने आया

सूत्रों के मुताबिक पहलगाम हमले के बाद कई सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और संदेश तेजी से वायरल किए गए। जांच एजेंसियों को शक है कि इनमें से कुछ सामग्री का उद्देश्य अफवाह फैलाना, भ्रम पैदा करना, सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठाना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव प्रभावित करना था। बताया जा रहा है कि डिजिटल जांच में कई ऐसे अकाउंट सामने आए जिनके कनेक्शन विदेशों से जुड़े होने की आशंका है।

पाकिस्तान पर क्यों उठे आरोप

Pakistan पर लंबे समय से भारत विरोधी डिजिटल प्रोपेगेंडा चलाने के आरोप लगते रहे हैं। भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग तरीके से पेश करने की कोशिश करते हैं। पहलगाम हमले के बाद भी जांच एजेंसियों ने दावा किया कि कुछ डिजिटल गतिविधियां संगठित और योजनाबद्ध लग रही थीं। हालांकि पाकिस्तान की ओर से अक्सर ऐसे आरोपों से इनकार किया जाता रहा है।

सुरक्षा एजेंसियां क्यों हैं अलर्ट

पहलगाम हमले के बाद एजेंसियां सिर्फ जमीनी जांच तक सीमित नहीं रहीं। अब साइबर विशेषज्ञ: सोशल मीडिया ट्रेंड, संदिग्ध अकाउंट,डिजिटल फंडिंग,एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग चैनल की भी जांच कर रहे हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भविष्य के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए डिजिटल नेटवर्क पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।

इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लेटफॉर्म्स को फर्जी अकाउंट पर कार्रवाई करनी चाहिए, हिंसा और आतंकवाद से जुड़े कंटेंट को तुरंत हटाना चाहिए, संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए ताकि ऑनलाइन माहौल को भड़काने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

भारत के सामने क्यों बढ़ी नई चुनौती

पहले सुरक्षा खतरे सीमाओं और जमीन तक सीमित माने जाते थे, लेकिन अब डिजिटल स्पेस भी बड़ा युद्धक्षेत्र बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में साइबर और सूचना आधारित युद्ध की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में भारत के लिए जरूरी होगा कि साइबर सुरक्षा मजबूत की जाए, डिजिटल निगरानी बढ़ाई जाए फर्जी नैरेटिव का तेजी से जवाब दिया जाए, लोगों को सही जानकारी समय पर मिले ।

पहलगाम हमले के बाद सामने आए डिजिटल प्रोपेगेंडा के आरोपों ने यह दिखा दिया कि आधुनिक दौर में आतंक और सूचना युद्ध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। The Resistance Front के दावों और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच ने कई सवाल खड़े किए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि देश की सुरक्षा अब सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।

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