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ईरान के सामने ट्रंप का अल्टीमेटम, झुकेगा तेहरान या भड़केगा पश्चिम एशिया?

US Iran tensions: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को चार अहम शर्तों वाला संदेश भेजा है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि तेहरान इन शर्तों को नहीं मानता, तो उसे गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पीछे हटने से इनकार कर दिया है।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका सख्त

डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी किसी भी हालत में ईरान को ऐसा कदम उठाने नहीं देंगे जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़े।

सूत्रों के अनुसार, इस समय तेहरान में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पिछले दो दिनों से ईरान में मौजूद हैं और लगातार उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के भी जल्द तेहरान पहुंचने की चर्चा है।

अमेरिका की चार प्रमुख शर्तें

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक चार स्पष्ट शर्तें पहुंचाई हैं।

ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से बंद करना होगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी तरह का नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए मार्ग खुला रखना होगा।
अंतिम समझौते तक आर्थिक प्रतिबंध जारी रहेंगे।
युद्ध या तनाव से हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका नहीं करेगा।

अमेरिका का कहना है कि समझौते से पहले प्रतिबंधों में किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।

व्हाइट हाउस की कड़ी चेतावनी

व्हाइट हाउस की ओर से भी ईरान को लेकर सख्त बयान सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि बातचीत विफल रही तो सैन्य कार्रवाई बेहद व्यापक हो सकती है। इस बयान के बाद पूरे पश्चिम एशिया में चिंता का माहौल बन गया है।

ईरान ने खींची अपनी ‘रेड लाइन’

इसी बीच तेहरान से आई खबरों के मुताबिक ईरान के सर्वोच्च नेता ने आदेश दिया है कि देश का संवर्धित यूरेनियम किसी भी स्थिति में विदेश नहीं भेजा जाएगा। इसे अमेरिका की प्रमुख मांगों को सीधे खारिज करने के रूप में देखा जा रहा है।

ईरानी नेतृत्व का कहना है कि दबाव में आकर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा और देश अपने परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है। मोहसिन नकवी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात कर अमेरिकी रुख की जानकारी दी है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि पाकिस्तान के जरिए मिले संदेशों की समीक्षा की जा रही है। बताया जा रहा है कि आगे की बातचीत को लेकर इस्लामाबाद में एक और दौर की बैठक हो सकती है।

क्या बढ़ेगा टकराव?

फिलहाल दोनों पक्षों के तेवर बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि अमेरिकी शर्तों के आगे झुकना देश की संप्रभुता के खिलाफ होगा। वहीं अमेरिका लगातार दबाव बढ़ा रहा है।

हालांकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव में आकर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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