Raghav Chadha BJP: हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति (Committee on Petitions) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति के पुनर्गठन के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया गया है, जिसमें चड्ढा को अहम भूमिका दी गई है।
याचिका समिति के अध्यक्ष बने हैं राघव चड्ढा
राज्यसभा की एक अधिसूचना के अनुसार, राघव चड्ढा को याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह पुनर्गठन राज्यसभा के सभापति द्वारा 20 मई से प्रभावी किया गया है। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इस समिति के लिए सदन के 10 सदस्यों को नामित किया है। चड्ढा के अलावा इस पैनल में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रंगव्रा नारज़ारी और संदोश कुमार पी शामिल हैं। एक अन्य अधिसूचना में राज्यसभा सचिवालय ने बताया कि सभापति ने 20 मई 2026 को डॉ. मेनका गुरुस्वामी को कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है।
राघव समेत 7 सांसद AAP से बीजेपी में हुए थे शामिल
आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे राघव चड्ढा ने राज्यसभा के छह अन्य सांसदों के साथ पार्टी को अलविदा कह दिया था। सभी सात सांसदों ने 27 अप्रैल को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। राज्यसभा में 10 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी के अब केवल 3 सदस्य ही बचे हैं। इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं।
दिल्ली HC में राघव ने डाली है याचिका
इस बीच राघव चड्ढा की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनके खिलाफ प्रसारित किए जा रहे फर्जी, एआई-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को तत्काल हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी सामग्री पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत है और इससे उनकी प्रतिष्ठा व व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि एआई और डीपफेक तकनीक के जरिए छेड़छाड़ की गई सामग्री का निर्माण और प्रसारण न केवल कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे अपूरणीय प्रतिष्ठात्मक क्षति भी हो रही है।

