Degree Verification Campaign in UP: उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात प्राचार्यों की नियुक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शासन ने संदेहास्पद दस्तावेजों के मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेशभर में चयनित 290 प्राचार्यों के प्रमाणपत्रों का दुबारा जांच कराने का आदेश जारी किया है।
फर्जी प्रमाणपत्रों पर मिली थी शिकायत
सूत्रों के अनुसार, 2019 में विज्ञापन संख्या 49 के तहत अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। 2021 में लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और दस्तावेज़ों के जांच के बाद पहली बार प्रदेश में 290 प्राचार्यों की नियुक्ति हुई थी। लेकिन इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान शोध अनुभव से जुड़े दस्तावेज़ों में धांधली की शिकायत शासन को प्राप्त हुई।
10 जिलों में जांच का आदेश
उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. शशि कपूर ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि चयनित प्राचार्यों के सभी प्रमाणपत्रों की जांच दो दिन के भीतर कराकर आख्या शासन को उपलब्ध कराई जाए। इसी क्रम में पूर्वांचल के 10 जिलों के महाविद्यालयों में जांच प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। संबंधित जिलों के प्रबंधकों और संस्थानों को आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों का बयान
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश वर्मा ने बताया, “हमें विज्ञापन संख्या 49 के आधार पर नियुक्त प्राचार्यों के दस्तावेज़ों की जांच करने का आदेश मिला है। जिलेवार स्तर पर सत्यापन कराया जा रहा है और प्रबंधकों से रिपोर्ट मांगी गई है।”
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भर्ती प्रक्रिया पर गहराया विवाद
गौरतलब है कि इस भर्ती प्रक्रिया में पहली बार प्राचार्य पद के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें 290 उम्मीदवारों को चयनित किया गया था, जबकि 65 नाम प्रतीक्षा सूची में शामिल किए गए थे। अब जब इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है, तो पूरे उच्च शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

