होम = Cover Story Top = भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में दर्शन से रोके गए संत नलिनानंद गिरी जी महाराज, प्रशासन पर गंभीर आरोप

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में दर्शन से रोके गए संत नलिनानंद गिरी जी महाराज, प्रशासन पर गंभीर आरोप

भगवान के द्वार सबके लिए खुले हैं” ये वाक्य हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से एक ऐसी खबर आई है जिसने श्रद्धालुओं और संतों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

संत नलिनानंद गिरी जी महाराज, जो सात समंदर पार अमेरिका में रहकर भी भारतीय संस्कृति का प्रचार कर रहे हैं, उन्हें भीमाशंकर मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। आरोप गंभीर हैं प्रशासन पर पक्षपात और अपमान के आरोप लगे हैं। आखिर क्या है इस विवाद की पूरी सच्चाई? क्यों एक संत को भगवान शिव के द्वार से खाली हाथ लौटना पड़ा? चलिए आपको विस्तार से बताते हैं।

सबसे पहले जानते हैं उस व्यक्तित्व के बारे में जिनके साथ यह घटना हुई। नलिनानंद गिरी जी महाराज कोई साधारण नाम नहीं हैं। वो वेदों के विद्वान हैं और अब तक दुनिया के 90 से ज़्यादा देशों में भागवत कथा का प्रचार-प्रसार कर चुके हैं।

मूल रूप से भारतीय होने के बावजूद, धर्म प्रचार के उद्देश्य से उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ली, ताकि वहां रहकर पश्चिमी दुनिया को सनातन धर्म की गहराई समझा सकें। उन्होंने संकल्प लिया था कि अपनी भारत यात्रा के दौरान वो सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करेंगे। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वो भीमाशंकर पहुँचे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यहाँ उनकी आस्था की नहीं, बल्कि उनके धैर्य की परीक्षा ली जाएगी।

महाराज जी का आरोप है कि वो निर्धारित समय पर मंदिर पहुँचे, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। प्रशासन का तर्क था कि मंदिर परिसर में निर्माण कार्य चल रहा है। यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि भीमाशंकर मंदिर को 9 जनवरी 2026 को जीर्णोद्धार और निर्माण के लिए 3 महीने के लिए बंद किया गया था। लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी इसे आम जनता के लिए पूरी तरह नहीं खोला गया।

महाराज जी ने न्यूज़ इंडिया 24/7 से बातचीत में एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा, मुझे जानकारी मिली थी कि मंदिर के अंदर वैकल्पिक रास्तों से दर्शन कराए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक बताया कि पैसे लेकर चोरी-छिपे दर्शन की व्यवस्था चल रही है। 14 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 2 बजे भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ बाक़ायदा हेलीकॉप्टर से भिमाशंकर पहुंचे.थे और उन्हें मंदिर में विशेष रूप से प्रवेश देकर दर्शन करवाए गए.थे। अब सवाल यही उठता है कि जब निशिकांत दुबे को दर्शन कराए जा सकते हैं तो जो संत 7 समंदर पार से सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने आया है उसको आखिर क्यों रोका गया ?

पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब महाराज जी ने एक बहुत ही सनसनीखेज आरोप लगाया। उनका कहना है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को बाक़ायदा उनकी तस्वीर दी थी और सख्त हिदायत दी थी कि “इन्हें अंदर नहीं जाने देना है।

एक संत के लिए इससे बड़ा अपमान क्या होगा? नलिनानंद गिरी जी ने इसे “आस्था के साथ अन्याय” करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भगवान के दर्शन के लिए भी प्रशासनिक रसूख या ‘सेटिंग’ की जरूरत पड़ेगी? उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत स्थानीय नेताओं और उच्च अधिकारियों से भी की है।

अब सवाल यह उठता है कि अगर मंदिर 3 महीने के लिए बंद था और समय सीमा पूरी हो चुकी थी, तो निर्माण कार्य में इतनी देरी क्यों? और अगर निर्माण के बावजूद दर्शन हो रहे थे, तो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के संत को आखिर क्यों रोका गया? क्या यह महाराज जी की विदेशी नागरिकता की वजह से हुआ? या फिर इसके पीछे कोई व्यक्तिगत रंजिश या प्रशासनिक अहंकार था? फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन यह चुप्पी कई संदेह पैदा करती है।

भारत के संविधान और सनातन परंपरा, दोनों में ही धार्मिक स्थलों पर सभी भक्तों को समान अधिकार दिए गए हैं। भीमाशंकर की यह घटना पारदर्शिता और प्रबंधन पर भी एक काला धब्बा है। अगर एक प्रसिद्ध संत को दर्शन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, तो सोचिए एक आम नागरिक की क्या ही बिसात होगी ?

नलिनानंद गिरी महाराज का अपमान सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है जो दूर-दराज से अपनी श्रद्धा लेकर इन पवित्र धामों में आते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इस मामले पर सफाई देगा और भविष्य में किसी भी श्रद्धालु के साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं होगा। इस पूरी घटना पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि मंदिरों में वीआईपी कल्चर या प्रशासनिक दखलंदाजी बढ़ती जा रही है?

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