Indore Water Crisis: देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर से एक बार फिर डराने वाली खबर सामने आई है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल पीने से बीमारियों और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को 60 वर्षीय गीता बाई धुरकर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे इलाके में दहशत और गुस्सा दोनों चरम पर हैं।
एक ही बीमारी, कई घर तबाह
बीते करीब 9 दिनों से भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला हुआ है। हालात ऐसे रहे कि कई घरों में एक साथ कई लोग बीमार पड़ गए। गीता बाई भी इसी प्रकोप की चपेट में आई थीं। परिजनों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से उनके बेटे और भतीजे की जान तो बच गई, लेकिन अधिक उम्र और लगातार दस्त-उल्टी के कारण गीता बाई की हालत बिगड़ती चली गई और शरीर में पानी की भारी कमी से उनकी मौत हो गई।
आंकड़े डराने वाले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 1400 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं।
272 मरीज अस्पताल में भर्ती किए गए
71 मरीज ठीक होकर घर लौटे
201 मरीज अभी भर्ती, जिनमें 32 ICU में हैं
स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक 6 माह के बच्चे समेत 15 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर कम संख्या बताई है।
दूषित पानी की जड़ क्या?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने पुष्टि की है कि पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ। जांच में सामने आया कि एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ है। इसी वजह से गंदगी पानी में मिल गई और सैकड़ों लोग बीमार हो गए।
सिस्टम पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से नलों से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा था। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जब जानें जा चुकी हैं, तब जाकर जांच और दावे किए जा रहे हैं।
प्रशासन की सफाई, जनता की मांग
प्रशासन का कहना है कि पानी के सैंपल जांच में भेजे गए हैं और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई और शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
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