Delhi News: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में रविवार की शाम पूरी तरह बिहार की संस्कृति के रंग में रंग गई। बिहार दिवस समारोह के अवसर पर ऐसा माहौल बना कि हर दर्शक की ज़ुबान पर एक ही पंक्ति गूंज उठी, गर्व से कहना… “हम हैं बिहारी” इस भव्य आयोजन की मुख्य आकर्षण रहीं बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ. नीतू कुमारी नवगीत, जिन्होंने अपनी सुमधुर आवाज़ और पारंपरिक गीतों के जादू से पूरे सभागार को बिहार की मिट्टी की महक से भर दिया। मंच पर शुरू होते ही पहला सुर ऐसा उठा कि श्रोता पलभर में ही मगही, भोजपुरी और मैथिली की मधुर दुनिया में खो गए।
ग्रामीण परिवेश की जीवंत झलक
कार्यक्रम की शुरुआत लोकगीत “उजर बगुला बिन…” से हुई, जिसने दर्शकों को ग्रामीण परिवेश की जीवंत झलक दिखाई। इसके बाद उन्होंने एक–एक करके ऐसे गीत गाए, जो न सिर्फ सुनने वालों के दिल को छू गए, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक गहराई को भी बखूबी प्रस्तुत करते हैं।
पिपरो न शोभे कोयल बिना…
पटना से बैदा बुलाई दा…
जनकपुर की नारी बता द बबुआ…” जैसे गीतों पर दर्शक तालियाँ और ठुमकों से मंच का उत्साह बढ़ाते रहे।
एक के बाद एक मधुर गीत
जब नीतू नवगीत ने गंगा मैया को समर्पित गीत “मांगी ला हम वरदान…” गाया, तो पूरा सभागार श्रद्धा और भक्ति के माहौल में डूब गया। इसके बाद उन्होंने सूफियाना अंदाज़ में “दमादम मस्त कलंदर…” सुनाकर ऊर्जा को चरम पर पहुँचा दिया। कार्यक्रम का चरम क्षण तब आया जब उन्होंने “बिहार गौरव गान” प्रस्तुत किया। इस गीत में बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों नालंदा, बोधगया, गंगा, और मिथिला का इतना जीवंत वर्णन था कि उपस्थित हर व्यक्ति की आंखों में सम्मान और गर्व साफ झलकने लगा। अंत में पूरा सभागार एक साथ नीतू नवगीत के साथ गूंज उठा- “गर्व से कहना हम हैं बिहारी, अपनी यही पहचान है।”
भारत मंडपम में आयोजित यह बिहार दिवस समारोह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बिहार की पहचान, स्वाभिमान और विरासत का ऐसा रंग मंच था, जिसने हर दिल में बिहार होने का गर्व और गहरा कर दिया।
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