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डैम, सीवर और रिवर मैनेजमेंट: बाढ़ से क्या सबक ले रहा है भारत?

Flood News : भारत हर साल मॉनसून में बाढ़ की मार झेलता है, लेकिन पिछले एक दशक में यह आपदा और भी खतरनाक रूप ले चुकी है। 2014 से 2024 के बीच देश के करीब 3 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र। यानि कुल जमीन का लगभग 10% हिस्सा, किसी न किसी रूप में बाढ़ से प्रभावित हुआ। खासकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पंजाब जैसे उत्तरी राज्यों में हालात ज्यादा गंभीर रहे।

2025 में पंजाब में आई बाढ़ ने इस संकट की भयावह तस्वीर पेश कर दी। अगस्त और सितंबर में हुई लगातार बारिश, कमजोर बांध, नदियों में बढ़ा जलस्तर और ड्रेनेज की खामियां, सब मिलकर पंजाब को जलमग्न कर गई।

पंजाब अन्न भंडार से बना “पानी का कटोरा”

पंजाब को देश का अन्न भंडार कहा जाता है, लेकिन इस बार बाढ़ ने इसे मानो “पानी का कटोरा” बना दिया। सतलज, ब्यास और रावी नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में मूसलधार बारिश के बाद भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों से पानी छोड़ा गया, जिससे पंजाब के निचले इलाके डूब गए। जहां करीब 350 गांव डूबे, 1.84 लाख लोग प्रभावित हुए और 1.7 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई।

गुरदासपुर, अमृतसर और फिरोजपुर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। यह बाढ़ पिछले तीन दशकों में सबसे बड़ी मानी जा रही है और इसे 1988 की विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे भयंकर आपदा कहा जा रहा है।

बाढ़ के बढ़ते कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, इन बाढ़ों के पीछे प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारण हैं।

  • क्लाइमेट चेंज: भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं में वृद्धि
  • कमजोर बांध: पुरानी संरचनाएं दबाव झेलने में असमर्थ
  • नदी किनारे अतिक्रमण: बस्तियां और खेती ने जलप्रवाह रोका
  • गाद जमा होना: नहरों और नदियों में सिल्ट की सफाई न होना
  • खराब शहरी ड्रेनेज: पुराने सीवर सिस्टम और जलभराव

बाढ़ प्रबंधन के लिए जरूरी कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ से बचने के लिए अब भारत को ठोस कदम उठाने होंगे।

मजबूत और आधुनिक बांध: पानी का संतुलन बनाने के लिए संरचनाओं को अपग्रेड करना।
नदियों और नहरों की नियमित सफाई: गाद और अवरोध हटाना।
अतिक्रमण पर रोक:  नदी किनारों और प्राकृतिक जलमार्गों को खुला रखना।
बेहतर ड्रेनेज सिस्टम: शहरों और गांवों में आधुनिक सीवर नेटवर्क।
अर्ली वार्निंग सिस्टम: समय रहते अलर्ट जारी कर जान-माल की रक्षा।

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पंजाब, हिमाचल और उत्तर भारत की यह तबाही बताती है कि अगर डैम, सीवर और रिवर मैनेजमेंट (Flood News) पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले सालों में बाढ़ और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। अब वक्त है कि भारत सिर्फ राहत और बचाव से आगे बढ़कर बाढ़ रोकथाम की ठोस रणनीति बनाए।

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