Mohini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। सभी एकादशियों में मोहिनी एकादशी का विशेष स्थान है, जिसे पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति देने वाला व्रत माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित होता है और श्रद्धा से व्रत रखने पर जीवन के दुख-दर्द दूर होने की मान्यता है।
मोहिनी एकादशी क्यों है खास?
धार्मिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया था। इसी घटना के कारण इस एकादशी को ‘मोहिनी एकादशी’ नाम दिया गया। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है।
इन गलतियों से रहें दूर
मोहिनी एकादशी का व्रत रखते समय कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है
चावल का सेवन न करें: इस दिन चावल खाना अशुभ माना जाता है।
तुलसी पत्ते न तोड़ें: पूजा के लिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
तामसिक भोजन से बचें: लहसुन, प्याज, मांस और शराब का सेवन वर्जित है।
ऐसे करें व्रत, मिलेगा पूरा फल
पीले वस्त्र पहनें: भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है, इसलिए पूजा में इसका विशेष महत्व है।
मंत्र जाप करें: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।
दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को अन्न, जल या वस्त्र का दान करना लाभकारी होता है।
दीपदान करें: शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें, लेकिन जल अर्पित न करें।
मोहिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को रखने से व्यक्ति मोह-माया के बंधनों से मुक्त होता है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और द्वापर युग में युधिष्ठिर ने भी इस व्रत का पालन कर अपने कष्टों से मुक्ति पाई थी। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जन्मों के पाप समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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