डॉ. रॉय क्षेमेंद्र, IIM जे.एन. टाटा स्कॉलर और बिहेवियरल साइंटिस्ट के अनुसार, फाइनेंशियल सर्विसेज़ में दिसंबर-मार्च (DJFM) का समय साल का सबसे महत्वपूर्ण सेल्स विंडो होता है। यह अवधि केवल फाइनेंशियल डेडलाइन ही नहीं, बल्कि इंसानी साइकोलॉजी का भी प्वाइंट होती है, जब परिवार जोखिम, रिज़ॉल्यूशन और क्लेम के लिए सक्रिय होते हैं।
दिसंबर- साल का रिव्यू और क्लोज़र साइकोलॉजी
साल के अंत में लोग अपने फाइनेंशियल पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हैं। लॉन्ग-टर्म केयर, डिसेबिलिटी कवर और सही टर्म इंश्योरेंस की कमी सामने आती है। टैक्स सेविंग, छुट्टियों की तैयारी और परिवार के लिए सुरक्षा को प्राथमिकता देने से एडवाइज़र को रेफरल और ऑडिट ट्रिगर मिलते हैं। 5–10 मिनट के माइक्रो-रिव्यू और पहले से भरे डेटा से क्लाइंट का कॉग्निटिव लोड कम होता है।
जनवरी- नया साल, नया इंश्योरेंस
जनवरी में लोगों में नए साल का साइकोलॉजिकल रीसेट होता है। हेल्दी, स्मार्ट और सुरक्षित जीवन की कल्पना उन्हें इंश्योरेंस की ओर खींचती है। रिज़ॉल्यूशन में लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस जोड़ना आसान निर्णय बनाता है। पुराने साल की लाइफ इवेंट्स जैसे शादी, बच्चा, प्रॉपर्टी खरीदना और करियर बदलाव कवरेज की जरूरत को स्पष्ट करते हैं।
मुख्य ट्रिगर्स और लीवर
- फाइनेंशियल चेक-अप: बदलाव और जोखिम का मूल्यांकन
- टैक्स ऑप्टिमाइज़ेशन: सेक्शन 80C/80D का लाभ
- इमोशनल सिक्योरिटी: इंश्योरेंस को परिवार का तोहफ़ा बनाना
- रेफरल प्रोग्राम: छुट्टियों का माहौल रेफरल बढ़ाता है
- एजुकेशन और मिथक तोड़ना: टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस के भ्रम दूर करना
DJFM प्लेबुक यह दिखाती है कि चार महीने की रणनीति कैसे साइकोलॉजी और फाइनेंशियल डेडलाइन के मेल से इंश्योरेंस सेल्स को बढ़ा सकती है।

