देश की सबसे बड़ी स्कूल परीक्षा प्रणाली माने जाने वाले Central Board of Secondary Education यानी सीबीएसई पर इस समय गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामला दो छात्रों की शिकायत से शुरू हुआ, लेकिन अब यह विवाद लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता का कारण बन गया है। आरोप है कि कुछ छात्रों को उनकी अपनी उत्तर पुस्तिका की जगह किसी दूसरे छात्र की कॉपी दिखाई गई। इस दावे ने न सिर्फ सीबीएसई की पारदर्शिता व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे मूल्यांकन और डिजिटल स्कैनिंग प्रक्रिया को लेकर भी बहस शुरू कर दी है।
बड़ा आरोप
विवाद तब और बढ़ गया जब कक्षा 12 के छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि सीबीएसई द्वारा भेजी गई उसकी भौतिक विज्ञान की उत्तर पुस्तिका उसकी थी ही नहीं। छात्र का कहना था कि उत्तर पुस्तिका में दिखाई गई लिखावट, वाक्य बनाने का तरीका, शब्दों के बीच दूरी और लिखने की शैली उसकी लिखावट से पूरी तरह अलग थी। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई छात्रों ने सवाल उठाया कि अगर एक छात्र को किसी और की उत्तर पुस्तिका दिखाई जा सकती है, तो क्या बाकी छात्रों की कॉपियां भी पूरी तरह सुरक्षित हैं ।
परिवार की चिंता
वेदांत के परिवार के मुताबिक शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई सामान्य भ्रम हुआ होगा। लेकिन जब उन्होंने दूसरी उत्तर पुस्तिकाओं और पुराने लिखावट नमूनों से तुलना की तो शक और गहरा हो गया। परिवार का कहना है कि अगर दिखाई गई कॉपी वास्तव में वेदांत की नहीं थी, तो उसकी असली उत्तर पुस्तिका आखिर कहां गई, यहीं से मामला सिर्फ एक छात्र की शिकायत न रहकर पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ गया।
सीबीएसई का जवाब
विवाद बढ़ने के बाद सीबीएसई ने बयान जारी करते हुए कहा कि शिकायत की जांच की गई है और छात्र को “सही उत्तर पुस्तिका” ही भेजी गई थी। हालांकि इसी बयान में बोर्ड ने यह भी कहा कि संबंधित छात्र के अंक अपडेट किए जा रहे हैं।
यहीं से नए सवाल खड़े हो गए।
अगर उत्तर पुस्तिका सही थी, तो अंक अपडेट क्यों किए गए?
क्या मूल्यांकन में गलती हुई थी?
क्या बारकोड टैगिंग या स्कैनिंग प्रक्रिया में कोई तकनीकी त्रुटि हुई?
या फिर ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कोई खामी सामने आई?
वेदांत के मामले के बाद एक और छात्रा संजना सामने आई। उसने रसायन विज्ञान की उत्तर पुस्तिका को लेकर गंभीर दावा किया। छात्रा के अनुसार उत्तर पुस्तिका का पहला पेज उसका था, लेकिन अंदर के कई पन्नों की लिखावट किसी दूसरे छात्र की लग रही थी। उसका कहना था कि व्यक्तिगत जानकारी तो उसकी थी, लेकिन उत्तर किसी और के दिखाई दे रहे थे। इस आरोप ने विवाद को और बड़ा बना दिया, क्योंकि अब सवाल सिर्फ एक उत्तर पुस्तिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पेज मैपिंग और डिजिटल अपलोड प्रक्रिया पर उठने लगा।
सिस्टम पर सवाल
सीबीएसई के मुताबिक इस साल लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की प्रक्रिया पूरी की गई। इनमें से 13 हजार से ज्यादा कॉपियों को विसंगतियों की वजह से मैन्युअल समीक्षा करनी पड़ी। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में विसंगतियां क्यों सामने आईं? क्या यह सिर्फ सामान्य लिपिकीय त्रुटियां थीं? या फिर डिजिटल प्रक्रिया प्रणाली में कोई बड़ी तकनीकी कमजोरी मौजूद है? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन, संग्रहित और डिजिटल रूप से जोड़ने की प्रक्रिया में छोटी सी गलती भी हजारों छात्रों को प्रभावित कर सकती है।
छात्रों की चिंता
इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा दी। इनमें बड़ी संख्या विज्ञान वर्ग के छात्रों की थी। भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान जैसे विषयों में प्रतियोगिता बेहद ज्यादा होती है। ऐसे में कुछ अंकों की गलती भी छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है। सोशल मीडिया पर कई छात्र अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उनकी उत्तर पुस्तिकाएं भी सही तरीके से जांची और अपलोड की गई हैं या नहीं।
सीबीएसई उत्तर पुस्तिका विवाद ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भले ही बोर्ड ने जांच और सुधार की बात कही हो, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के मन में संदेह अभी भी बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सीबीएसई इस मामले में कितनी पारदर्शिता दिखाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है। क्योंकि यह मामला सिर्फ दो छात्रों का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और भरोसे से जुड़ा हुआ है।
ये भी पढ़े: https://newsindia24x7.com/health-news/obesity-increases-alzheimers-risk-study-43613/

